💥धारा 185 मोटर व्हीकल एक्ट के तहत न्यायालय में पेश, प्रत्येक चालक पर ₹10-10 हजार का अर्थदंड।
💥नशे में वाहन चलाने वालों पर लगातार कार्रवाई जारी,
दुर्घटनाओं की रोकथाम रायगढ़ पुलिस की प्राथमिकता।
तहतक न्यूज /रायगढ़, छत्तीसगढ़। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के दिशा निर्देशन पर सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एडिशनल एसपी अनिल सोनी के मार्गदर्शन एवं डीएसपी यातायात उत्तम प्रताप सिंह के नेतृत्व में यातायात पुलिस द्वारा शहर के प्रमुख चौक-चौराहों एवं राष्ट्रीय राजमार्गों पर नियमित रूप से ब्रीथ एनालाइजर के माध्यम से वाहन चालकों की जांच की जा रही है। इसी क्रम में रविवार को गोगा राइस मिल के पास सारंगढ़ रोड ओडिशा हाईवे पर विशेष जांच अभियान चलाया गया, जिसमें भारी वाहन चालकों की जांच के दौरान पांच चालक शराब सेवन कर वाहन चलाते पाए गए।
यातायात पुलिस द्वारा सभी चालकों के विरुद्ध धारा 185 मोटर व्हीकल एक्ट के तहत इस्तगासा तैयार कर सोमवार 22 जून को न्यायिक मजिस्ट्रेट रायगढ़ के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां सभी पांच वाहन चालकों को ₹10,000-₹10,000 के अर्थदंड से दंडित किया गया।
उल्लेखनीय है कि धारा 185 मोटर व्हीकल एक्ट के तहत शराब अथवा नशीले पदार्थ के प्रभाव में वाहन चलाने पर पहली बार अपराध सिद्ध होने पर छह माह तक का कारावास अथवा ₹10,000 तक का जुर्माना अथवा दोनों से दंडित किए जाने का प्रावधान है। तीन वर्ष के भीतर पुनरावृत्ति होने पर दो वर्ष तक का कारावास अथवा ₹15,000 तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित या निरस्त किया जा सकता है तथा दुर्घटना की स्थिति में भारतीय न्याय संहिता की अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
“नशे की हालत में वाहन चलाना एक गंभीर अपराध है, जो स्वयं के साथ-साथ अन्य लोगों की जान को भी खतरे में डालता है। सभी वाहन चालक यातायात नियमों का पालन करें और शराब सेवन के बाद वाहन चलाने से बचें। सड़क सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध रायगढ़ पुलिस की सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।” - एसएसपी शशि मोहन सिंह, रायगढ़।
बहरहाल, यातायात पुलिस की सख्त कार्रवाई से जहाँ मदिरा प्रेमियों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गयी हैं वहीं परिजनों के चेहरे पर संतुष्टि के भाव नजर आने लगे हैं। सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए रायगढ़ पुलिस द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान निःसंदेह प्रशंसा के योग्य है, लेकिन बात तहतक की करें तो दुर्घटनाजन्य स्थानों पर सूचना या संकेतक बोर्ड का न होना, संकरी व क्षतिग्रस्त पुलियों, बीच सड़क में गड्ढे, दूर से दिखायी नहीं देने वाले ब्रेकर, आँखों को चुभने वाले वाहनों के एलईडी लाईट, बिना पार्किंग लाईट के सड़क किनारे खड़े ट्रक, सवारी बसों व ट्रकों में लगे तेज हार्न जैसे कई ऐसी चीजें हैं जो दुर्घटना के बड़े नहीं तो छोटे कारण जरूर हैं। इस पर भी गंभीरतापूर्वक ध्यान दिया जाय तो संभवतः काफी हद तक दुर्घटनाओं पर काबू पाया जा सकता है।


उल्लेखनीय है कि आज ही सुबह दस बजे रायगढ़-घरघोड़ा मार्ग में बाइक से जा रहे लैलूंगा के पाकुट गाँव निवासी जयप्रकाश चिराईपानी के समीप क्षतिग्रस्त पुलिया से गिरकर हादसे का शिकार हो गया। ऐसा नहीं है कि यह पहला हादसा है, जबसे यह पुलिया बना है तबसे दर्जनों घटनाएं हो चुकी हैं।



