रायगढ़ में स्थापित न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) में शुरू हुआ वैज्ञानिक परीक्षण

💥 थाना लैलूंगा का गांजा परीक्षण हेतु पहुंचा पहला जप्त मादक पदार्थ।
💥रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों की पुलिस को मिलेगा स्थानीय स्तर पर फॉरेंसिक जांच का लाभ।
💥समय पर जांच रिपोर्ट मिलने से अपराध अनुसंधान होगा अधिक प्रभावी, लंबित प्रकरणों के निराकरण में आएगी तेजी।
💥वर्तमान आपराधिक कानूनों में बढ़ी फॉरेंसिक साक्ष्यों की भूमिका, क्षेत्रीय एफएसएल से पुलिसिंग व्यवस्था होगी और सशक्त।
तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। जिले में स्थापित क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) में वैज्ञानिक परीक्षण की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। क्षेत्रीय एफएसएल रायगढ़ में अब रायगढ़, सक्ती एवं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के थानों में जप्त व्हीसरा, नारकोटिक्स तथा अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच स्थानीय स्तर पर की जा रही है। इसी क्रम में दिनांक 17 जून 2026 को थाना लैलूंगा द्वारा एनडीपीएस एक्ट के एक प्रकरण में जप्त मादक पदार्थ (गांजा) को परीक्षण हेतु क्षेत्रीय एफएसएल रायगढ़ में स्वयं थाना प्रभारी लैलूंगा उप निरीक्षक गिरधारी साव द्वारा अपने स्टाफ के साथ परीक्षण हेतु जमा कराया गया। यह क्षेत्रीय एफएसएल कार्यालय में जांच के लिए जमा किया गया पहला जप्त मादक पदार्थ है।
         विदित हो कि 17 मई 2026 को सुशासन तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायगढ़ के राजमहल के समीप स्थापित क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) का विधिवत शुभारंभ किया था। इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला में वर्तमान में रायगढ़, सक्ती एवं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों की पुलिस द्वारा एनडीपीएस (नारकोटिक्स), केमिस्ट्री तथा बायोलॉजी (सेरोलॉजी, सीमेन एवं ब्लड) से संबंधित परीक्षण कराए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक जांच सुविधा उपलब्ध होने से पुलिस को समय पर जांच रिपोर्ट प्राप्त होगी, जिससे अपराध अनुसंधान अधिक प्रभावी होगा और पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने में सहायता मिलेगी।
        अब तक इन तीनों जिलों की पुलिस को ब्लड सैंपल, व्हीसरा, स्लाइड, मादक पदार्थ, केमिकल एवं अल्कोहल परीक्षण के लिए बिलासपुर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजना पड़ता था। इससे जांच रिपोर्ट प्राप्त होने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता था। रायगढ़ में क्षेत्रीय एफएसएल प्रारंभ होने के बाद अधिकांश परीक्षण स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सकेंगे, जिससे विवेचना की समय-सीमा में कमी आएगी तथा लंबित मामलों के निराकरण में तेजी आएगी। अपराध जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सटीक और प्रभावी बनने के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया को भी गति मिलेगी।
     सीन ऑफ क्राइम यूनिट रायगढ़ के संयुक्त संचालक डॉ. पी.एस. भगत ने बताया कि वर्तमान आपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच को विशेष महत्व दिया गया है तथा वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह प्रयोगशाला क्षेत्र की पुलिसिंग व्यवस्था को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनाएगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध फॉरेंसिक सुविधाओं से वैज्ञानिक साक्ष्यों के परीक्षण में तेजी आएगी, जिससे अपराधों की विवेचना और अभियोजन दोनों को मजबूती मिलेगी।
      "भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के लागू होने के बाद अपराध अनुसंधान में फॉरेंसिक साक्ष्यों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। नए कानूनों का उद्देश्य वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित विवेचना को बढ़ावा देना है, जिससे अपराधियों के विरुद्ध मजबूत और विश्वसनीय साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए जा सकें। रायगढ़ में क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक जांच सुविधा उपलब्ध होने से विवेचना की गुणवत्ता, गति और पारदर्शिता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। समयबद्ध फॉरेंसिक रिपोर्ट से गंभीर अपराधों की जांच को मजबूती मिलेगी, अभियोजन पक्ष अधिक प्रभावी होगा तथा पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने में सहायता मिलेगी। यह सुविधा आधुनिक, तकनीक-संचालित और वैज्ञानिक पुलिसिंग को नई दिशा प्रदान करेगी।" -- एसएसपी शशि मोहन सिंह, रायगढ़।

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