तहतक न्यूज/घरघोड़ा-रायगढ़, छत्तीसगढ़। जिले के घरघोड़ा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत चारमार गाँव क्षेत्र में एक जंगली मादा हाथी मालगाड़ी की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसे में हाथी के पिछले हिस्से और एक पैर में गहरी चोट आई थी। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
यह हादसा बीते सोमवार की रात करीब 9 से 10 बजे के बीच हुआ, जब कोयला परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले रेलवे ट्रैक को 10 हाथियों का एक दल पार कर रहा था। ट्रैक पार करने के दौरान एक मालगाड़ी की चपेट में आने से करीब 45 वर्षीय मादा हाथी बुरी तरह जख्मी हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि हाथी की कमर और पिछले पैरों में गहरी चोटें आईं और अत्यधिक खून बहने लगा। हादसे के बाद लोको पायलट ने तत्काल रेलवे कंट्रोल रूम में घटना की जानकारी दी और मालगाड़ी को रोक दिया। रेलवे ट्रेक में हादसे की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण घटना स्थल पर पहुंचने लगे। हादसे के बाद घायल हथिनी के साथ अन्य हाथियों का दल भी आसपास मौजूद था, जिसके चलते लोग करीब नहीं आ पाए लेकिन कुछ देर बाद जब लोगों की आवाजाही बढ़ी तो वे हाथी जंगल की ओर चले गए।
ग्रामीणों द्वारा घटना की जानकारी दिए जाने के तुरंत बाद वन विभाग की टीम, उप वन मंडलाधिकारी आशुतोष मंडावी और वन परिक्षेत्र अधिकारी विक्रांत सिंह के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। पशु चिकित्सकों की टीम ने रातभर मादा हाथी को बचाने का हरसंभव प्रयास किया। दर्द कम करने और उसके शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए पानी भी डाला गया। गंभीर अंदरूनी चोटों के कारण हालत में सुधार नहीं हुआ और मंगलवार सुबह इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। वन विभाग ने मादा हाथी के शव का पंचनामा तैयार कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।आस-पास के ग्रामीणों को हाथियों के दल से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और सतर्क रहने की हिदायत दी गई है क्योंकि यह दल लंबे समय से इसी क्षेत्र में है और लगातार वन क्षेत्र में विचरण कर रहा है।
जिले में निरंतर हो रहे हाथियों के अकाल मौतों में बात तहतक की करें तो रायगढ़ धर्मजयगढ़ दोनों वन मंडल में पिछले छह माह के दौरान करीब 10 हाथी शावकों की भी मौत हो चुकी है और अब चारमार के पास मालगाड़ी की चपेट में आने से वयस्क मादा हाथी की मौत से जहाँ एक और नई चिंता खड़ी हो गयी है वहीं वन्य जीव संरक्षण की प्रथम जिम्मेदार वन विभाग जो सिर्फ और सिर्फ ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह देने के सिवा कुछ नहीं कर पा रहा है, सवालों के आईने में खड़ा नजर आ रहा है। हाथियों के मौतों का सिलसिला और हाथी-मानव द्वन्द पिछले कई सालों से चला आ रहा है, लेकिन वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर आज तक न कोई ठोस नीति नजर आयी और ना ही कोई सकारात्मक परिणाम देखने को मिला। ऐसा प्रतीत होता है कि वन विभाग का कर्तव्य केवल घटना के बाद मृत पशुओं का पंचनामा व पोस्टमार्टम करा कर जला देना और लोगों को दूर रहने की हिदायत देना रह गया है। उल्लेखनीय है कि वनों और वन्य जीव-जंतुओं के संरक्षण के लिए शासन के खजाने का एक बड़ा हिस्सा हर साल खर्च होता है, परन्तु विडंबना यह है कि इसका पूरा-पूरा लाभ न तो जंगलों को मिल रहा है और ना ही वन्य पशु-पक्षियों को मिल रहा।



