हरे-भरे लाखों वृक्षों की बलि चढ़ाने वाला अदानासुर दे रहा पर्यावरण संरक्षण की सीख, 350 पौधे लगा शुरू किया हरित पर्यावरण अभियान

💥मानसून आते ही शुरू हो जाता है पर्यावरण की चिंता।

💥पौधरोपण करते हुए फोटो खिंचवा पीटते हैं संरक्षण का ढिंढोरा।

💥पौधरोपण के साथ-साथ पौधों का संरक्षण भी जरुरी।

तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। मानसून आते ही लोगों को पर्यावरण का ख्याल आने लगता है और फिर शुरू हो जाता है पौधे लगाने का तिलस्मी अभियान। कुछ दिनों तक हरे-भरे पौधे तो दिखाई देते हैं, बाद में उनका नामोनिशान तक नहीं रह जाता। पर्यावरण संरक्षण को लेकर जिले में पिछले कई सालों से विभिन्न संस्थाओं, संगठनों, शासकीय विभागों और कंपनियों द्वारा पौधरोपण किया जाता रहा है, परन्तु जो सकारात्मक परिणाम सामने आना चाहिए वो नहीं आया जबकि, ठीक इसके विपरीत प्रदूषण और तापमान का ग्राफ निरन्तर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में दिखावे का पौधरोपण कर और छपास रोगियों की तरह फोटो खिंचवा कर अपने जिम्मेदारियों से इतिश्री कर लेना कहाँ की बुद्धिमानी है?                
              उल्लेखनीय है कि पर्यावरण को सर्वाधिक क्षति उद्योगों की स्थापना और उनकी लापरवाही से पहुँचती है। दिखावे के लिए औद्योगिक घराने बारिश के दिनों में अपने ही उद्योग परिसर में चंद पौधे लगाकर यह जताना चाहते हैं कि हमने पर्यावरण संरक्षण को लेकर बहुत बड़ा काम किया है। कुछ इसी तरह की कारस्तानी जंगल के पेड़ों को घुन और दीमक की तरह चट कर जाने वाला बहुचर्चित कंपनी अडानी भी कर रहा है।
         कंपनी द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर रायगढ़ स्थित अदाणी पावर लिमिटेड की ओर से पर्यावरण संरक्षण को लेकर “हरित पर्यावरण अभियान” की शुरुआत की गई। इस अवसर पर संयंत्र परिसर में 350 पौधों का रोपण किया गया। वित्तीय वर्ष 2026–27 के दौरान पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र के विस्तार के उद्देश्य से कुल 29,500 पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के साथ साथ स्थानीय लोगों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने में सहयोग मिलेगा।
         अब स्थानीय लोगों का कहना है कि चंद दिन में पूरा जंगल उजाड़ने वाला अपने ही परिसर में 350 पौधे लगाकर पूरे साल भर में मात्र साढ़े 29 हजार पौधे रोपने की बात करता है। क्या इतने में नुकसान की भरपायी हो पाएगी? बात तहतक की करें तो एक पौधे को वृक्ष बनने में सालों-साल लग जाते हैं। ऐसे में हरियाली बढ़ाने और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के दावे करना उस प्रेमी के झूठे वादे की तरह है जो अपनी प्रेमिका को खुश करने के लिए आसमान से सितारे तोड़ लाने की बात करता है।
सालों बाद न जाने कब पेड़ तैयार होंगे फिर ये स्वच्छ वातावरण देंगे तब तक तो यहाँ सबका बंटाधार हो चुका होगा।

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