तबाही का पर्याय "सिंघल स्टील"  का रुख अब पूर्वांचल की ओर, गुस्से में आग बबूला हो रहे ग्रामीण जनसुनवाई का करेंगे पूरजोर विरोध

💥तराईमाल-गेरवानी को बर्बाद कर अब कोतरलिया के आबो-हवा में जहर घोलने की तैयारी।
💥रायगढ़ की जीवन रेखा केलो नदी को प्रदूषित करने में बदनाम सिंघल का डबल धमाका।
💥मंडराता खतरा देख स्थानीय ग्रामीणों में सुलग रही विरोध की चिंगारी।
💥जिले के अन्य उद्योगों की मनमानी और तानाशाही रवैये से हलाकान सांसत में हैं जिले वासी।

तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। प्रदेश का एक ऐसा जिला जो प्रदूषण की मार से मलेरिया के मरीज की तरह थरथरा रहा है और अब गिरने की कगार पर है। वर्तमान में  संचालित उद्योगों ने जिस तरह से यहाँ के पर्यावरण पर कहर बरपा रखा है और पूरे जिले को धीमा जहर परोस बीमारी और मौत के आगोश में झोंक दिया है, ऐसी हालत में और नए उद्योग की स्थापना अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है।
              विदित हो कि आगामी 6 जुलाई 2026 को मेसर्स सिंघल स्टील प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ग्राम पतरापाली, कोतरलिया और सियारपाली में प्रस्तावित विशाल ग्रीनफील्ड स्टील प्लांट की स्थापना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु जनसुनवाई आयोजित की गई है। यह सुनवाई प्रातः 11 बजे से स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय पतरापाली (पूर्व) के सामने मैदान में होगी। जीवन दायिनी केलो नदी के जल को काला करने के मामले में बदनाम प्रदूषणकारी कंपनी सिंघल प्लांट की एक और यूनिट स्थापना से पूर्वांचल के लोगो में दहशत, चिंता और भारी आक्रोश का माहौल है। लोगों को मालूम है कि यहां भी कई गाँव के उपजाऊ जमीन बंजर हो जाएंगे, हरियाली समाप्त हो जाएगी, किसानों की रोजी रोटी छीन जाएगी तथा जहरीले धूल-गर्दों और फ्लाई ऐश के उड़ते गुबारों के बीच जीवन-यापन करते तिल-तिल कर मरने को मजबूर होंगे।
             बता दें कि कंपनी रायगढ़ में एकीकृत स्टील प्लांट लगाना चाहती है। जिसमें मुख्य यूनिट 17 लाख टीपीए, पेलेट प्लांट 12 लाख टीपीए, कोल वासरी 6 लाख टीपीए इसके अलावा ऑक्सीजन-नाइट्रोजन प्लांट, कोल गैसीफायर और ब्रिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी शामिल है।

गुस्से में भड़के ग्रामीणों में विरोध के स्वर हुए तेज
    सिंघल स्टील प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्तावित ग्रीनफील्ड स्टील प्लांट की लोक सुनवाई 6 जुलाई को होने जा रही है, लेकिन उससे पहले ही पतरापाली, कोतरलिया सहित आसपास के कई गांवों में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। लोगों का कहना है कि जिले में पहले से शताधिक वृहद उद्योग संचालित हैं, जिनसे भारी मात्रा में प्रदूषण फैल रहा है। इस खतरनाक प्रदूषण से खेती-बाड़ी बर्बाद हो गया है और लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। यही वजह है कि ग्रामीणों में नाराजगी धीरे-धीरे बढ़ रही है जो कभी भी विस्फोटक रूप ले सकता है।

पुराने उद्योगों में स्थानीय लोगों को मिली सिर्फ मजदूरी
        प्रस्तावित प्लांट के लिए पतरापाली, कोतरलिया, सियारपाली की जमीन जाएगी। यहाँ के ज्यादातर परिवार धान, सब्जी और महुआ पर निर्भर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यहाँ स्थापित पुराने उद्योगों में स्थानीय लोगों को सिर्फ मजदूरी मिली, स्थायी या सम्मानजनक नौकरी केवल बाहरी लोगों को दी गई।

देश के सबसे प्रदुषित जिलों में अव्वल रायगढ़ जिला
             रायगढ़ को देश के सबसे प्रदुषित जिलों में गिना जाता है। यहाँ के वातावरण में चौबीसों घंटे खतरनाक रसायन युक्त धूल के गुबार उड़ रहे हैं। पेड़-पौधों की हरियाली करियाली में बदल चुकी है। घरों की छतों में काली राख की परतें जम गयी हैं। जरा सी हवा चली नहीं कि नजारा धूल भरी आँधी में तब्दील हो जाती है। यहाँ बिना मास्क के साँस लेना गंभीर बिमारियों को न्योता देना है।


पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी खामोश क्यों?
     आम जन मानस के मन में यह सवाल बार-बार बिजली की तरह कौंध रही है कि रायगढ़ के चर्चित विधायक व वित्तमंत्री जो पर्यावरण मंत्री भी हैं, रायगढ़ के विकास के लिए धुआँधार काम कर रहे हैं। जैसे - 19.70 करोड़ की लागत से कोड़ातराई-पुसौर-सूरजगढ़ मार्ग का शिलान्यास, महतारी सदन का निर्माण, और यात्री प्रतीक्षालय व सीसी रोड का लोकार्पण, 'नालंदा परिसर' जैसी आधुनिक लाइब्रेरी के लिए 43 करोड़ के निवेश की पहल, सिंदूर पार्क, राम कॉलोनी में बाल उद्यान का जीर्णोद्धार (लागत ₹46 लाख), साहू समाज सामुदायिक भवन, और विभिन्न वार्डों में डामरीकृत सड़कों (छातामुड़ा, अमलीभौना, बोईरदादर आदि) का भूमिपूजन, कोयलंगा नाला पुल (लागत 2.89 करोड़) निर्माण, गोतमा-कोतासुरा मार्ग (लागत 3.92 लाख) का निर्माण और महापल्ली क्षेत्र में 9.37 करोड़ के सड़क निर्माण कार्य, लोईंग में 3.44 करोड़ की लागत से आईटीआई भवन और बटमुल आश्रम महाविद्यालय में अतिरिक्त कक्षों का निर्माण, रायगढ़ में मेडिकल कॉलेज की स्थापना, भूमि सीमांकन और सीमा दीवार निर्माण कार्यों की समीक्षा कर निर्माण में तेजी लाने के निर्देश, स्थल निरीक्षण और प्रशासन प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग आदि, लेकिन जिले में कोरोना की तरह फैल रहे पर्यावरण प्रदूषण के रोकथाम या प्रदुषणकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पर्यावरण मंत्री होने के नाते उनकी कहीं कोई एक्टिविटी की तस्वीरें सामने क्यों नहीं नजर आतीं ?

    

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