तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। अधिक पैदावार के लालच में रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से जहाँ मिट्टी की उपजाऊ क्षमता धीरे-धीरे क्षीण होती जा रही है, वहीं खाद्य सामग्रियों जैसे अनाज और सब्जियों की गुणवत्ता में भारी कमी देखने को मिल रही है। मार्केट में बिकने वाली सब्जियाँ दिखने में ताजी और हरी-भरी तो लगती हैं, लेकिन केमिकल युक्त इन सब्जियों में न तो कोई स्वाद है और न ही आवश्यक पोषक तत्व। यही कारण है कि मधुमेह, रक्तचाप, थाइराइड, कैंसर, मोटापा, प्रतिरोध क्षमता में कमी जैसी बिमारियों से जूझना पड़ रहा है। यदि, समय रहते रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग को नियंत्रित नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं जब धरती पूरी तरह से बंजर हो जाएगी और इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए जागरूक किसान अब जैविक खेती की ओर रुख कर रहे हैं और इसे समझने व अपनाने के लिए प्रयासरत हैं। इसी क्रम में बीते 29 मई 2026 को एचडीएफसी बैंक परिवर्तन के सहयोग से PRADAN रायगढ़ टीम द्वारा रायगढ़ के 8 गांवों के किसानों एवं टीम सदस्यों का झारखंड राज्य के गुमला जिले के घाघरा प्रखंड स्थित पोढ़ा गांव में संचालित बायो रिसोर्स सेंटर (BRC) एवं जैविक खेती मॉडल का एक्सपोजर विजिट आयोजित किया गया।
इस भ्रमण का उद्देश्य किसानों को BRC सेंटर की कार्यप्रणाली, जैविक खेती के सफल मॉडल तथा ग्रामीण महिलाओं द्वारा संचालित गतिविधियों से हो रहे भूमि सुधार एवं अन्य लाभों की समझ विकसित करना था, ताकि जैविक खेती को और प्रभावी तरीके से बढ़ावा दिया जा सके तथा रायगढ़ क्षेत्र में नए BRC सेंटर की शुरुआत की जा सके।
भ्रमण के दौरान टीम ने वर्ष 2021 से BRC सेंटर संचालित कर रही राजमुनी देवी एवं महिला समूहों से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि शुरुआत में किसान जैविक खेती अपनाने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन महिलाओं ने स्वयं छोटे स्तर पर जैविक खेती शुरू कर उसके सकारात्मक परिणाम दिखाए। धीरे-धीरे अन्य किसान भी इससे जुड़ते गए और आज लगभग 600 किसान महिलाएं जैविक खेती से जुड़ चुकी हैं।
BRC द्वारा तैयार किए जा रहे सुपर कम्पोस्ट, बहु-बीज विटामिन टॉनिक, अग्निअस्त्र, ब्रह्मास्त्र, जीवामृत, वर्मी कम्पोस्ट सहित विभिन्न जैविक उत्पादों को देखा गया तथा उनके निर्माण एवं उपयोग की जानकारी प्राप्त की गई। वर्तमान में यह BRC सेंटर किसानों एवं एफपीओ को जैविक खाद और जैविक कीटनाशक उपलब्ध करा रहा है। किसानों ने बताया कि जैविक खेती अपनाने से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। खेतों में धान की पैरा से मल्चिंग करने के कारण नमी लंबे समय तक बनी रहती है, खरपतवार कम उगते हैं तथा सिंचाई के लिए कम पानी की आवश्यकता पड़ती है।
फिलहाल, यह एक्सपोजर विजिट किसानों एवं महिला समूहों के लिए सीख और प्रेरणा का महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ, जिससे रायगढ़ क्षेत्र में जैविक खेती एवं BRC मॉडल को मजबूत करने की दिशा में नई समझ विकसित हुई है। जरूरत है इसे और अधिक से अधिक बढ़ावा देने की, ताकि हमारी धरती की उर्वरा शक्ति बनी रहे और लोगों को इसका भरपूर लाभ मिल सके। जिले में शासकीय विभागों, निजी कंपनियों और समाजसेवी संस्थाओं द्वारा अन्य सामाजिक हित के लिए हजारों-लाखों रूपये फूँक दिए जाते हैं, वहीं किसानों के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित हों तो इसका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष फायदा न केवल किसान वर्ग को ही मिलेगा, बल्कि समाज के तमाम लोगों को मिलेगा।



