नौनिहालों की शिक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में एनटीपीसी ने उठाया सार्थक कदम

तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। जिले में स्थापित उद्योगों द्वारा सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने की चर्चाएं होती हैं तो लोग यही कहते हैं कि केवल औपचारिकताएं निभाई जाती हैं, लेकिन एनटीपीसी हमेशा से न केवल अलग हटकर कार्य किया है अपितु क्षेत्रीय जनता ने उसके जनहित के कार्य की सराहना भी की है। उल्लेखनीय है कि शिक्षा के क्षेत्र में भी अहम भूमिका निभाते हुए एनटीपीसी लारा के प्रयास से गांवों के आंगनवाड़ी केंद्र सर्व सुविधायुक्त बन रहे हैं। बचपन की शिक्षा को मज़बूत बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम उठाते हुए एनटीपीसी  लारा ने एक विचारशील सामुदायिक विकास पहल के माध्यम से परियोजना-प्रभावित गांवों में स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों को अपना सहयोग प्रदान किया। यह दिन उत्साह और मुस्कुराहटों से भरा रहा, जब बच्चे स्कूल बैग, पानी की बोतलें और स्टेशनरी का सामान लेने के लिए इकट्ठा हुए। वहीं, केंद्रों में सीखने के माहौल को बेहतर बनाने के लिए नई बैठने की चटाइयां भी उपलब्ध कराई गईं।


               इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती रेखा ठाकुर (अध्यक्षा, प्रेरिता महिला समिति) के साथ समिति की वरिष्ठ सदस्य श्रीमती रूपा सिंघा रॉय, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभा को संबोधित करते हुए श्रीमती रेखा ठाकुर ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के अथक प्रयासों की सराहना की और बच्चों के शुरुआती वर्षों में एक मजबूत शैक्षिक नींव रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने उनके समर्पण की प्रशंसा करते हुए आग्रह किया कि वे उसी उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ अपना कार्य जारी रखें, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हर बच्चे को जीवन में एक सही शुरुआत मिल सके।
                      इस पहल ने न केवल केंद्रों तक आवश्यक संसाधन पहुंचाए, बल्कि नौनिहालों  के पोषण में सामूहिक प्रयासों के महत्व को भी रेखांकित किया। समुदाय की सक्रिय भागीदारी के साथ, यह कार्यक्रम एनटीपीसी लारा की समावेशी विकास और जमीनी स्तर पर भावी पीढ़ी को सशक्त बनाने की निरंतर प्रतिबद्धता का एक जीवंत प्रमाण बन गया।

       बहरहाल, अब बात करें तहतक की तो अपने सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन जिले में स्थापित गिनी-चुनी कम्पनियाँ ही कर रही हैं, जिनमें एनटीपीसी अपना अलग महत्व रखता है बाकि और भी ऐसी कई कम्पनियाँ हैं जो केवल दोहन, शोषण और धनोपार्जन में ही व्यस्त रहती हैं। यदकदा कोई कभी-कभार स्वास्थ्य शिविर लगा दे तो दवाइयों में खर्च कम विज्ञापनों में व्यय ज्यादा करती हैं। हकीकत यह है कि प्रदूषणकारी उद्योगों की स्थापना से स्थानीय जनता का विकास तो दूर पूरा वातावरण प्रदूषण की मार से तबाह हो गया है। जल, जंगल, जमीन की जगह धूल, गर्दा और बीमारियों ने कब्जा कर लिया है। करोड़ों-अरबों कमाने वाली सभी कम्पनियाँ अगर प्रदूषण नियंत्रक उपकरणों का ईमानदारी से उपयोग और सामाजिक हित के कार्यों में निःस्वार्थ भूमिका निभाएं तो स्थानीय जनता भी कंधा से कंधा मिला कर सहयोग अवश्य करती।

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