
💥 आरोपी की पूंजीपथरा, तमनार, घरघोड़ा और रायगढ़ बाजारों से 25 बाइक चोरी में संलिप्तता।
💥 संगठित गिरोह द्वारा फर्जी दस्तावेज तैयार कर बड़ी चालाकी से खपाई जा रही थीं चोरी की बाइक्स।
💥गिरोह के 7 आरोपी पूर्व में गिरफ्तार, 25 बाइक, लैपटॉप और प्रिंटर भी जब्त।
तहतक न्यूज/पूँजीपथरा-रायगढ़, छत्तीसगढ़। संगठित वाहन चोर गिरोह के मुख्य आरोपी और शातिर बाइक चोर विकेश दास महंत (27 वर्ष), पिता गनपत दास महंत, निवासी सांगीतराई डीपापारा जूटमिल को साइबर थाना और पूंजीपथरा पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
बता दें कि आरोपी पूर्व में भी बाइक चोरी प्रकरण में गिरफ्तार हो चुका था तथा जेल से छूटने के बाद साइबर थाना एवं पूंजीपथरा पुलिस उसकी गतिविधियों पर सतत निगरानी रखे हुए थे। 9 फरवरी को आरोपी को पुनः पूंजीपथरा क्षेत्र में संदिग्ध रूप से घूमते देखा गया, जिस पर संयुक्त टीम द्वारा घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया। आरोपी को थाना पूंजीपथरा में धारा 303(2) एवं 112(2) भारतीय न्याय संहिता के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

उल्लेखनीय है कि 1 फरवरी को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित प्रेस वार्ता में एसएसपी शशि मोहन सिंह ने एक संगठित बाइक चोर गिरोह का पर्दाफाश किया था। गिरोह द्वारा बाइक चोरी कर उनके फर्जी दस्तावेज तैयार कर बाजार में बिक्री किए जाने का खुलासा हुआ था। कार्रवाई में गिरोह के मुख्य आरोपी मुकेश चौहान सहित कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर 25 चोरी की बाइक, एक एप्पल लैपटॉप तथा एक कलर प्रिंटर जब्त किया गया था।
जांच में सामने आया था कि गिरोह चोरी की बाइक को खपाने के लिए सुनियोजित तंत्र का उपयोग करता था। थाना पूंजीपथरा एवं साइबर थाना की संयुक्त टीम द्वारा दो चोरी की बाइक के साथ पकड़े गए मुकेश प्रधान से पूछताछ में खुलासा हुआ कि बाइक ऑटो डीलर नेटवर्क के माध्यम से बेची जाती थीं। लैलूंगा के ऑटो डीलर से जुड़े व्यक्तियों और पूर्व कंप्यूटर ऑपरेटरों की मदद से लोक सेवा केंद्र के जरिए वाहनों के फर्जी पंजीयन एवं आरसी तैयार किए जाते थे। आरोपी अजय पटेल चोरी की बाइक के चेचिस नंबर से वास्तविक मालिक की जानकारी निकालकर ऑनलाइन पीबीसी कार्ड मंगवाता, उसमें कंप्यूटर से हेरफेर कर फर्जी आरसी तैयार करता और ट्रांसफर कार्ड पर कूटरचित हस्ताक्षर कर डीलरों व आम खरीदारों को भ्रमित किया जाता था।
बहरहाल, बाइक चोरी करने वाले गिरोह के पकड़े जाने से क्षेत्र के लोगों की चिंता कम हुई है, लेकिन उनके मन में यही सवाल बार-बार उठ रहे हैं कि क्या ये शातिर चोर जमानत पर छूटने के बाद सुधर जायेंगे या पूर्व की भांति फिर से चोरी का धंधा शुरू कर देंगे?
दरअसल, चोरों के मामले में तह तक जाकर देखें तो जेल जाने के दौरान वहाँ एक से बढ़कर एक शातिर लोगों से इनका परिचय होता है, जो इन्हें बढ़ावा देते हैं। दूसरी बात, जेल से छूटने के बाद इन्हें कोई काम पर नहीं रखता। जब इन्हें कोई काम नहीं मिलता तो ये पुनः वही चोरी, उठाईगिरी जैसे अवैध कार्य करने लग जाते हैं। इस प्रकार समाज से अलग अपराध की दुनिया में कदम रख यही लोग बड़े अपराधों जैसे गैंगवार, लूटपाट, हत्या, बलात्कार, डकैती आदि संगीन वारदातों को बेखौफ होकर अंजाम देने से नहीं चूकते। यह समाज, पुलिस और कानून के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। इसके लिए कोई ठोस नीति बना कर प्रभावी कदम उठाये जाने की जरुरत है, तभी ऐसे अपराधों पर अंकुश लगा पाना संभव हो पायेगा। अन्यथा, जेल में मुजरिमों की संख्या बढ़ती ही जाएगी।
