
तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में वाहनों के आवागमन से सड़क दुर्घटनाओं की तस्वीरें रोजाना देखने को मिल रही हैं। इन दुर्घटनाओं का मुख्य कारण अक्सर मानवीय भूल या लापरवाही होती है। यह जरा सी भूल या लापरवाही व्यक्ति और उसके परिवार के लिए जीवन भर का अभिशाप बन जाती है। यदि, यातायात नियमों का प्रत्येक व्यक्ति ईमानदारी और सख्ती से पालन करे तो उसका सफर निश्चित रूप से सुरक्षित, सफल और आनंदमय होगा। रायगढ़ जिला अब एक बड़े औद्योगिक नगरी का रूप ले चुका है और यहाँ बढ़ते यातायात के दबाव से सड़क दुर्घटनायें भी आम हो गयीं हैं। यही वजह है कि जिले के नये वरिष्ठ पुलिस कप्तान शशि मोहन सिंह ने इसे गंभीरता से लिया है और उनके निर्देशन में पूरे जिले में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से रायगढ़ पुलिस द्वारा एक ओर जहाँ, मोटर व्हीकल एक्ट के तहत प्रतिदिन सघन जांच कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर आम नागरिकों को सुरक्षित यातायात के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
इसी कड़ी में आज 08 फरवरी को थाना कोतरारोड़ प्रभारी निरीक्षक मोहन भारद्वाज द्वारा स्थानीय जिंदल वाहन पार्किंग परिसर में वाहन चालकों को यातायात नियमों के पालन, सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम तथा उनसे बचाव के उपायों के संबंध में जागरूक किया गया। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में वाहन चालक उपस्थित रहे, जिन्हें सुरक्षित ड्राइविंग के महत्व से अवगत कराया गया।
थाना प्रभारी ने अपने संबोधन में कहा कि जिन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियां अधिक हैं, वहां वाहनों की संख्या भी ज्यादा होती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना केवल एक व्यक्ति की जान नहीं लेती, बल्कि उसके पूरे परिवार के लिए जीवनभर का न भरने वाला शून्य छोड़ जाती है। वाहन चालक की एक छोटी-सी लापरवाही भी जीवनभर का पछतावा बन सकती है।
उन्होंने वाहन चालकों से अपील की कि वे नशे की हालत में वाहन न चलाएं, नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें तथा सीट बेल्ट सहित सभी यातायात नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करें। साथ ही सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को देखकर अनदेखा न करने की अपील करते हुए “राहवीर योजना” की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि कोई नागरिक सड़क दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को तत्काल अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर पहुंचाकर उसकी जान बचाने का प्रयास करता है, तो शासन की राहवीर योजना के अंतर्गत उसे सम्मानित किया जाता है तथा 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
कार्यक्रम के दौरान थाना कोतरारोड़ का स्टाफ भी उपस्थित रहा। रायगढ़ पुलिस का उद्देश्य केवल कार्रवाई तक सीमित न रहकर नागरिकों में जिम्मेदार यातायात व्यवहार विकसित करना है, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावी कमी लाई जा सके।
इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना रायगढ़ पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है। यातायात नियमों का उल्लंघन न केवल कानून तोड़ना है, बल्कि यह स्वयं और दूसरों के जीवन को जोखिम में डालना भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लापरवाही, तेज रफ्तार और नशे में वाहन चलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही आम नागरिकों से अपील की कि वे जिम्मेदार चालक बनें, यातायात नियमों का पालन करें और सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद के लिए आगे आएँ, ताकि समय पर उपचार मिल सके और अनमोल जिंदगियाँ बचाई जा सकें।
सुरक्षित यातायात को लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से किये जा रहे प्रयास निःसंदेह प्रशंसनीय है। बात तहतक की करें तो आज की जनता जागरूक तथा शिक्षित है और उसे पुलिस को हर संभव सहयोग करने की आवश्यकता है न कि पुलिस से आँख-मिचौली करने की। प्रायः देखा गया है कि कई लोग हेलमेट होते हुए भी उपयोग नहीं करते, सीट बेल्ट लगाना तो जैसे उनके शान के खिलाफ है। भले ही आगे मोड़ पर चल रहे चेकिंग को देखकर वहीं घंटों रुक जायेंगे या वापस मुड़ जायेंगे, लेकिन नियमों का पालन नहीं करेंगे। युवा वर्ग की तो बात ही निराली है। घर से निकलते वक्त बड़े-बुजुर्ग लाख कहें, लेकिन उनकी बात नहीं मानेंगे। हेलमेट से उनकी हेयर स्टाइल ही दब जाएगी तो गर्लफ्रेंड इम्प्रेस्ड कैसे होगी? वहीं, पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर चलने वाली कुछ युवतियाँ और महिलाएँ भी स्कूटी हाथ लगते ही हम किसी से कम नहीं के तर्ज पर फर्राटे भरती हुई ‘हवा में उड़ता जाये मेरा लाल दुपट्टा मलमल का’ पुराना गाना गुनगुनाने को मजबूर कर देती हैं। अब ऐसे में भला कोई क्या करे। पहले तो ‘सड़क सुरक्षा सप्ताह’ मनाया जाता था अब ‘सड़क सुरक्षा माह’ मनाया जाता है फिर भी दुर्घटनाओं के आंकड़े कम नहीं हो रहे। सवाल उठता है कि क्या अब पूरे वर्ष भर ‘सड़क सुरक्षा साल’ मनाना पड़ेगा? तभी लोग यातायात नियमों का पालन करेंगे? क्या पुलिस के पास और कोई काम नहीं है? ऐसे सवाल तो अनेकों हैं, मगर हम सब जनता को इसे गंभीरता से लेनी चाहिए और यातायात नियमों का जबरन नहीं दिल से पालन करना चाहिए ताकि, हम सब सुरक्षित रह सकें।
