किफायत के चक्कर में ये मुआ एथेनॉल, कहीं बन तो नहीं रहा जी का जंजाल..?

तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण (E20 Fuel) के इस्तेमाल से पुरानी गाड़ियों में खराबी और माइलेज कम होने की शिकायतें देशभर से सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया से लेकर संसद तक इस मुद्दे पर बहस छिड़ी हुई है। वाहन मालिकों और ऑटो एक्सपर्ट्स का कहना है कि एथेनॉल की रासायनिक संरचना के कारण पुराने वाहन इस ईंधन को पूरी तरह झेल नहीं पा रहे हैं। हालांकि, सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय का दावा है कि E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है और ARAI (ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया) के परीक्षणों में इंजन फेल होने जैसी कोई समस्या नहीं पाई गई है।
         विदित हो कि गाड़ियां खराब होने के मुख्य कारण एथेनॉल की कुछ खास रासायनिक विशेषताओं की वजह से गाड़ियों के इंजन और फ्यूल सिस्टम पर असर पड़ता है, जैसे कि -
नमी सोखना (Hygroscopic Nature) - 
 एथेनॉल हवा से नमी (पानी) को बहुत तेजी से सोखता है। पेट्रोल टैंक में पानी जमा होने से ईंधन अलग हो जाता है, जिससे टैंक के अंदर जंग लगने और इंजन चालू न होने (मिसफायर) की समस्या आती है।
पार्ट्स का गलना और कटना-
एथेनॉल एक शक्तिशाली सॉल्वेंट (विलायक) है। यह पुरानी गाड़ियों (विशेषकर अप्रैल 2023 से पहले की बनी) के रबर पाइप, गास्केट, सील और प्लास्टिक के हिस्सों को धीरे-धीरे गला देता है।
फ्यूल पंप और इंजेक्टर का जाम होना -
एथेनॉल पुराने इंजन में जमा कचरे और कार्बन को पिघला देता है, जो फ्यूल लाइन्स और इंजेक्टर के नोजल में जाकर उन्हें ब्लॉक कर देता है।
माइलेज में गिरावट -
एथेनॉल का ऊर्जा घनत्व (Energy Density) शुद्ध पेट्रोल के मुकाबले लगभग 34% कम होता है। सरकार और मंत्रालय के बयानों के अनुसार माइलेज में 1 से 6% की मामूली कमी आती है, लेकिन कुछ वाहन मालिक 10 से 30% तक माइलेज गिरने का दावा कर रहे हैं।
कौन सी गाड़ियां सुरक्षित हैं और कौन सी खतरे में?
       जो गाड़ियाँ 1 अप्रैल 2023 से पहले मैन्युफैक्चर हुई हैं, वे केवल E10 (10% एथेनॉल) या शुद्ध पेट्रोल के लिए डिजाइन की गई थीं। इन गाड़ियों के इंजन मटीरियल E20 पेट्रोल को लंबे समय तक झेलने के अनुकूल नहीं हैं।
पूरी तरह सुरक्षित (E20 Compliant)
1 अप्रैल 2023 के बाद बेचे जाने वाले सभी नए वाहनों को सरकार के नियमों के अनुसार E20-मटीरियल कंप्लायंट बनाया गया है। इनमें एथेनॉल-प्रतिरोधी रबर, विशेष कोटिंग वाले मेटल और एडवांस फ्यूल इंजेक्टर का उपयोग किया जाता है, इसलिए इन्हें कोई नुकसान नहीं होता।
अपनी पुरानी गाड़ी को खराबी से कैसे बचाएं?
         यदि आपकी गाड़ी अप्रैल 2023 से पुरानी है, तो इन सावधानियों को अपनाकर आप बड़े नुकसान से बच सकते हैं।
फ्यूल एडिटिव्स का उपयोग करें -
बाजार में विशेष रूप से डिजाइन किए गए Ethanol Fuel Additives मिलते हैं। इन्हें पेट्रोल डलवाते समय टैंक में मिलाने से ईंधन में नमी (पानी) जमा नहीं होती और जंग लगने का खतरा कम हो जाता है।
टैंक को लंबे समय तक खाली न छोड़ें -
         यदि गाड़ी लंबे समय तक खड़ी रहने वाली है, तो फ्यूल टैंक को पूरा भरकर रखें। खाली टैंक में हवा के कारण नमी सोखने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
नियमित सर्विसिंग और सफाई -
हर सर्विसिंग के दौरान मैकेनिक से फ्यूल फिल्टर, फ्यूल लाइन्स (रबर पाइप) और इंजेक्टर की जांच जरूर करवाएं ताकि कोई भी लीकेज या ब्लॉकेज समय रहते पकड़ा जा सके।
प्रीमियम या हाई-ऑक्टेन फ्यूल -
यदि संभव हो, तो कुछ भरोसेमंद पेट्रोल पंपों से प्रीमियम ईंधन का विकल्प चुन सकते हैं, हालांकि देश में अब ज्यादातर जगहों पर E20 अनिवार्य कर दिया गया है।
          बहरहाल, पेट्रोल वाहन मालिक अपने वाहनों की सुरक्षा को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं और उनके माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं। मध्यम वर्गीय परिवार अपने सुख-सुविधा के लिए पाई-पाई जोड़कर मन पसंद गाड़ी खरीदता है यही सोचकर कि अपने जीवन काल तक इसका इस्तेमाल करूँगा और जब वही गाड़ी समय से पहले धोखा देने लगेगी तो उस पर क्या गुजरेगी किसी से छिपी नहीं है। सवाल उठता है कि जहाँ आम इंसान अपनी खून-पसीने की कमाई का एक बड़ा हिस्सा टैक्स के रूप में दे कर सकता है वहीं, नार्मल पेट्रोल क्यों नहीं खरीद सकता? सस्ता के चक्कर में क्यों एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल लेकर मुसीबत झेलेगा?

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