
💥 नवजवान युवक की चाकू मार कर हत्या।
💥 एक दर्जन से अधिक बदमाशों ने की मारपीट फिर चाकुओं से गोदा।
💥 असहाय नारी की मदद करना भी गुनाह।
तहतक न्यूज/विदिशा, मध्य प्रदेश। युवती के साथ हो रही छेड़छाड़ को वह सहन नहीं कर सका और सामने आकर विरोध कर दिया तो मनचले बदमाशों ने उसे बेरहमी से चाकू मारकर मौत की नींद सुला दी। सिविल लाइन थाना क्षेत्र की इंद्रप्रस्थ कॉलोनी में बीते 3 जनवरी की रात एक युवती से छेड़छाड़ का विरोध करने पर 22-24 वर्षीय युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक शुभम चौबे (नंदू) पेशे से एसी (AC) मैकेनिक था। शुभम ने करैया खेड़ा रोड निवासी मुख्य आरोपी चुन्नी और उसके साथियों को एक युवती के साथ छेड़छाड़ करने से रोका था। इसी रंजिश में आरोपियों ने गंभीर वारदात को अंजाम दिया। आरोपी चुन्नी अपने 10-15 साथियों के साथ बाइक पर आया और शुभम को घर से बाहर बुलाया। बदमाशों ने पहले उसके साथ मारपीट की और फिर चाकुओं से गोद दिया। पूरी घटना नजदीक के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। पुलिस ने मुख्य आरोपी चुन्नी और उसके साथियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और उनकी तलाश के लिए टीमें गठित की गई हैं।
गंभीर रूप से घायल शुभम को अस्पताल ले जाया गया जहाँ चिकित्सकों ने प्रारंभिक जाँच में ही मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद से इलाके के निवासियों में दहशत और आक्रोश का माहौल है।
समाज में आये दिन बढ़ रहे इस तरह के आपराधिक घटनाओं में तहतक जाकर देखें तो वर्तमान समय में पुलिस और कानून का न तो कोई खौफ रह गया है और न ही भरोसा। स्थिति यह है कि आम नागरिक असामाजिक तत्वों से डरने लगे हैं। यही वजह है कि घटना के समय लोग मदद के बजाय मुकदर्शक बन दूर से तमाशा देखते रहते हैं या फिर वहाँ से निकल चलने में ही अपनी भलाई समझते हैं। शुभम के पक्ष में सारे मोहल्ले वासी एकजुट हो जाते तो बीच बस्ती में चंद गुंडों की क्या मजाल कि वो शुभम की बेरहमी से हत्या कर देते। लोग सामने आते तो शायद उसकी जान बच जाती। छत्तीसगढ़ में एक कहावत है ‘खीरा चोर जोंधरी चोर, धीरे-धीरे सेंधफोर’ अर्थात् चोर का पहला कदम बाड़ी में लगे खीरे या मक्के चुराने से शुरू होता है, जिसे गंभीरता से नहीं लिया जाता लेकिन, वही आगे चलकर धीरे-धीरे सेंधमारी करने लगता है और शातिर चोर बन जाता है। अगर शुरुआती दौर में ही असामाजिक अथवा गैरकानूनी हरकत करने वालों पर ठोस और कड़ी कार्रवाई हो तो दुबारा वह हिम्मत नहीं करता, लेकिन कमजोर पुलिसिंग और लचर कानून व्यवस्था से अपराधी जमानत पर छूट जाता है और अपना दबदबा बनाने बड़े अपराध करने लगता है। गाँधीजी ने ठीक ही कहा था ‘कोई एक थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल आगे कर दो’।
फिलहाल, सुखी जीवन जीना है तो आज के सभ्य कहे जाने वाले समाज में आँख, कान और मुँह बंद रखा जाय तभी इंसान जिंदा रह पायेगा अन्यथा, यहाँ हर कोई शेर है निवाला बनना पड़ेगा।
