💥वन विभाग की बड़ी लापरवाही, खुला छोड़ दिए बाड़े में घुस आवारा कुत्तों ने किया हमला।
💥 दो दुर्लभ चौसिंगा सहित सात चीतल और छः कोटरी की दर्दनाक मौत।
💥रेंजर को कारण बताओ नोटिस तथा डिप्टी रेंजर और वन कर्मियों पर गिरी निलंबन की गाज।
💥 तीन सदस्यीय जाँच टीम को 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश।
तहतक न्यूज/अंबिकापुर, छत्तीसगढ़। अंबिकापुर के संजय पार्क से एक बेहद ही हैरान कर देने वाली सनसनी खेज तस्वीरें सामने आयी हैं, जिसमें बाड़े में घुसकर कुछ कुत्तों ने वहां मौजूद वन्यजीवों पर हमला कर दिया। इस हमले में 15 हिरणों की मौत हो गई। हिरणों की बड़ी संख्या में हुई मौत ने जहाँ पूरे क्षेत्र में हड़कम्प मचा दिया है तो वहीं पार्क प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार बीते 20 और 21 मार्च की दरमियानी रात छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित संजय वन वाटिका में पार्क प्रबंधन की लापरवाही के चलते रविवार दोपहर बाड़े का गेट खुला रह गया, जिसके बाद 4 से 5 आवारा कुत्ते अंदर घुस गए और वहां मौजूद वन्यजीवों पर हमला कर 15 वन्य जीवों को मार डाला। मरने वाले वन्यजीवों में 7 चीतल, 6 कोटरी और 2 दुर्लभ चौसिंगा शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि संजय पार्क में बाड़ा बनाकर बड़ी संख्या में हिरण, कोटरी और बारहसिंगा को रखा गया है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में भारी लापरवाही के चलते कुत्तों ने इन पर हमला कर दिया और हिरण मारे गए। इतना ही नहीं, मृत जानवरों के शव को आनन-फानन में जला भी दिया गया। मौके से जली हुई चिता के अवशेष भी मिले हैं, जिनमें हिरण और कोटरी के अवशेष स्पष्ट रूप से देखे गए। इतना ही नहीं, जिस स्थान पर शव जलाए गए वहां से खून से सना एक धारदार हथियार भी बरामद हुआ है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले को रफा दफा करने का प्रयास भी किया गया। आरोप है कि संजय पार्क प्रबंधन और वन विभाग के अधिकारियों ने मिलकर मृत वन्यजीवों के शवों को शनिवार को पार्क के पीछे जंगल में ले जाकर ग्रीन मैट लगाकर जला दिया, ताकि घटना की भनक बाहर न लगे। वहीं घटना के बाद भी पार्क परिसर में एक हिरण का शव खुले में पड़ा मिला।



फिलहाल, सरगुजा के वन मंडलाधिकारी अभिषेक जोगावत ने इस गंभीर लापरवाही पर कड़ा एक्शन लेते हुए ड्यूटी पर तैनात डिप्टी रेंजर अशोक सिन्हा सहित कर्मचारियों में प्रतिमा लकड़ा, बिंदु सिंह और ममता पोर्ते को निलंबित कर दिया गया है। अंबिकापुर रेंजर को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। एसडीओ के नेतृत्व में एक तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है, जिसे 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है तथा संजय पार्क को तीन दिनों के लिए बंद कर दिया गया है।
बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम से लोग काफी हैरान हैं और उनके मन में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। घटनाक्रम के हकीकत की तहकीकात में तहतक जाकर देखें तो इस प्रकार की घटनाओं के पीछे की जो सच्चाई है वो ये है कि शासकीय विभागों में एक वन विभाग सबसे सुस्त और केवल औपचारिकता निभाने वाला विभाग बनकर रह गया है। यही वजह है कि वन एवं वन्य जीव-जंतुओं की सुरक्षा के लिए जहाँ इतने कठोर कानून बनाये गए हैं, वहीं जंगल और जंगली पशु-पक्षियों का अस्तित्व सुदृढ़ होने के बजाय घटता ही जा रहा है। वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाते तो इन दुर्लभ जीवों की बली नहीं चढ़ती। सवाल यह भी उठता है कि इन बेजुबानों की मौत के जिम्मेदार लोगों पर क्या कठोर और दंडात्मक कार्रवाई भी होगी? या फिर सजा के रूप में केवल निलंबित कर खानापूर्ति कर दी जाएगी?
