
तहतक न्यूज/कोरबा,छत्तीसगढ़। जब पूरा देश गणतंत्र दिवस समारोह का जश्न मना रहा था तब, इसी देश का एक जवान अपने ही अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर अपनी जिंदगी खत्म करने की कोशिश कर रहा था। जी हाँ, यह दुःखद और चिन्ताजनक घटना की खबर ऊर्जा नगरी कोरबा से सामने आयी है, जहाँ देश की आजादी और संविधान का उत्सव मनाते वक्त एक खाकीधारी जवान ने विषपान कर प्राण देने का प्रयास किया।
कोरबा के कलेक्ट्रेट परिसर में गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में ध्वजारोहण का कार्यक्रम चल रहा था तभी, वहाँ उपस्थित बर्खास्त होमगार्ड जवान संतोष पटेल ने कीटनाशक पी लिया। देखते ही देखते कलेक्ट्रेट में अफरा-तफरी मच गई और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने जवान को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया। बताया जा रहा है कि
उसे कुछ समय पहले ही नौकरी से निकाल दिया गया था, जिसकी वजह से वह काफी परेशान और तनाव में चल रहा था। पुलिस को संतोष के पास से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उसने अपने आत्मघाती कदम उठाये जाने का जिम्मेदार होमगार्ड के जिला कमांडेंट अनुज एक्का और डिवीजनल कमांडेंट को ठहराया है। सुसाइड नोट के अनुसार संतोष इन अधिकारियों द्वारा किए जा रहे मानसिक प्रताड़ना और शोषण से बुरी तरह टूट चुका था। नोट में स्पष्ट लिखा है कि वह इन अधिकारियों के दुर्व्यवहार की वजह से ही अपनी जिंदगी खत्म कर रहा है।
कोरबा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला नौकरी जाने और अधिकारियों की प्रताड़ना से जुड़ा लग रहा है। पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है और सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की सच्चाई खंगाली जा रही है। फिलहाल जवान की हालत नाजुक बनी हुई है।
वैसे देखा जाय तो ऐसे कई विभाग हैं, जहाँ अफसरशाही चरम पर है। अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर बेवजह रौब जमाते रहते हैं और जरा सी विरोध पर बात-बात में अपमानित या डाँट-डपट करना अपनी शान समझते हैं। कर्मचारी नौकरी चले जाने के भय से चुप रहने को मजबूर हो जाते हैं। जब अति हो जाता है तो संतोष पटेल जैसे लोग विवश होकर आत्मघाती कदम उठा लेते हैं जिसका दुःखद परिणाम उसके परिवार के बेकसूर सदस्यों को भुगतना पड़ता है।
