कोचिंग सेंटरों पर शिकंजा कसने जा रही छत्तीसगढ़ सरकार, नहीं चलेगी मनमानी


तहतक न्यूज/रायपुर, छत्तीसगढ़। प्रदेश में कोचिंग सेंटरों की मनमानी पर लगाम लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने कोचिंग संस्थानों के संचालन को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए छत्तीसगढ़ कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक 2026 का प्रारूप तैयार किया है। इसके लागू होने पर फीस से लेकर विद्यार्थियों की सुरक्षा तक कई कड़े नियम तय हो सकते हैं।
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, 20 या इससे अधिक विद्यार्थियों वाले कोचिंग सेंटरों के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा। पंजीकरण पांच साल के लिए वैध रहेगा। फीस में पारदर्शिता, कोर्स बीच में छोड़ने पर शुल्क वापसी और छात्रावासों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए काउंसलिंग, उत्पीड़न की शिकायतों के समाधान और 24 घंटे हेल्पलाइन की व्यवस्था प्रस्तावित है। नियमों की निगरानी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय प्राधिकरण और जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जिला समितियां बनाई जाएंगी।
नियम तोड़ने वाले संस्थानों पर 10 हजार से 5 लाख रुपये तक जुर्माना लगाने और गंभीर मामलों में पंजीकरण रद्द करने का प्रावधान रखा गया है।
        फिलहाल, यह विधेयक प्रारूप के स्तर पर है। उच्च शिक्षा विभाग ने इसे अंतिम रूप देने से पहले अभिभावकों, शिक्षाविदों, युवाओं और आम लोगों से सात दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं।
        उल्लेखनीय है कि, देशभर में निजी कोचिंग सेंटरों की मनमानी, भ्रामक विज्ञापनों और सुरक्षा मानकों में लापरवाही पर लगाम लगाने के लिए केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। शिक्षा मंत्रालय के राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के बाद अब राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर कड़े कानून और नियम लागू कर रही हैं।
सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम और नियम
1. उम्र और दाखिले पर सख्त पाबंदी
16 साल से कम उम्र या 10वीं कक्षा पास करने से पहले छात्रों का प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे JEE, NEET) के बैच में दाखिला पूरी तरह प्रतिबंधित है तथा नियमित स्कूल जाने वाले छात्रों को स्कूल के समय में कोचिंग नहीं दी जा सकती। हरियाणा जैसे राज्यों में दोपहर 3 या 4 बजे के बाद ही कोचिंग संचालन की अनुमति है।
2. रजिस्ट्रेशन और पारदर्शिता अनिवार्य
हर कोचिंग सेंटर (विशेषकर जहाँ 50 से अधिक छात्र हैं) का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। यदि किसी संस्थान की एक से अधिक शाखाएँ हैं, तो प्रत्येक शाखा को अलग इकाई मानकर अलग से पंजीकरण कराना होगा। सभी सेंटरों को अपनी वेबसाइट पर शिक्षकों की योग्यता, फीस का विवरण और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी पारदर्शी रूप से देनी होगी।
3. फीस और रिफंड पॉलिसी
शैक्षणिक सत्र के दौरान किसी भी हाल में फीस नहीं बढ़ाई जा सकती। यदि कोई छात्र बीच में ही कोचिंग छोड़ता है, तो संस्थान को बची हुई अवधि की फीस (हॉस्टल और मेस फीस सहित) 10 दिनों के भीतर वापस करनी होगी।
4. भ्रामक विज्ञापनों पर रोक
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के नियमों के तहत "100% सिलेक्शन" या "गारंटीड रैंक" जैसे झूठे दावे करने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। कोचिंग संस्थान बिना छात्र की लिखित सहमति के उसके नाम, फोटो या वीडियो का इस्तेमाल अपने विज्ञापन के लिए नहीं कर सकते।
5. सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर मानक
दिल्ली, यूपी और झारखंड (रांची) जैसे राज्यों में अवैध बेसमेंट, बिना वेंटिलेशन और पर्याप्त निकास द्वार न होने वाले संस्थानों पर लगातार सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है। सभी कोचिंग संस्थानों के लिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और बिल्डिंग कंप्लीशन सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है।
6. मानसिक स्वास्थ्य और टाइमिंग (तनाव मुक्त पढ़ाई)
छात्र दिन में अधिकतम 5 घंटे ही कोचिंग पढ़ सकते हैं। बहुत सुबह या देर रात को क्लास लगाने पर रोक है। छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए हफ्ते में एक दिन की छुट्टी अनिवार्य है और छुट्टी के ठीक अगले दिन कोई टेस्ट नहीं लिया जा सकता। छात्र-छात्राओं के मानसिक तनाव को दूर करने के लिए मनोवैज्ञानिक और करियर गाइडेंस काउंसलर की व्यवस्था करना जरूरी है।

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