छत्तीसगढ़ के लाल ने किया कमाल, एयर प्रेशर से चलने वाला इंजन का किया सफल परीक्षण

तहतक न्यूज/छत्तीसगढ़। भिलाई (कोहका) के एक मोटर सायकल मैकेनिक बादल वर्मा ने बिना पेट्रोल, डीजल या महँगी बैटरी के सिर्फ हवा के प्रेशर से चलने वाला इंजन का वर्किंग प्रोटोटाइप तैयार किया है। इस अनोखे आविष्कार को अंजाम देने वाले बादल वर्मा पिछले कई वर्षों से बाइक रिपेयरिंग की दुकान चला रहे हैं। उन्हें यह आइडिया बोरवेल मशीन को देखकर आया, जो भारी पत्थरों को तोड़ने के लिए भारी हवा के दबाव (एयर प्रेशर) का उपयोग करती है। इस तकनीक को समझने और इंजन को तैयार करने में उन्हें लगभग 5 साल का समय लगा।
यह इंजन पारंपरिक ईंधन जलाने के बजाय एक टैंक में अत्यधिक संपीड़ित हवा (Compressed Air) को स्टोर करता है। जब इस हवा को छोड़ा जाता है, तो इसका दबाव पिस्टन को घुमाता है, जो यांत्रिक ऊर्जा में बदल जाता है। उनका दावा है कि इंजन का परीक्षण पूरी तरह सफल रहा है। एक बार हवा की टंकी पूरी तरह भरने के बाद, यह गाड़ी बिना किसी ईंधन खर्च और शून्य कार्बन उत्सर्जन के करीब 50 से 60 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है। बादल ने इस प्रोजेक्ट को अपने स्तर पर फंड करने के लिए अपने गहने तक बेच दिए थे।     
       वर्तमान में, इंजन तैयार है लेकिन गाड़ी के व्यावहारिक मॉडल, डिजाइन और एक मजबूत टैंक फिटिंग के लिए उन्हें अब वैज्ञानिक स्तर के मार्गदर्शन, सरकारी संस्थाओं या किसी तकनीकी संस्थानों की मदद की आवश्यकता है।
         बता दें कि बादल वर्मा पेशे से मोटर सायकल मैकेनिक हैं और पिछले दस सालों से हाउसिंग बोर्ड इलाके में बाइक रिपेयर शॉप चला कर अपनी मेहनत से परिवार का खर्च चलाते हैं। इसके बाद भी वो समय निकालकर नए-नए प्रयोग करते रहते हैं। उनका कहना है कि स्कूल के समय से ही उनके अंदर कुछ अलग करने का शौक था।
बादल के अनुसार, इस प्रोजेक्ट पर उन्होंने करीब पाँच साल पहले काम शुरू किया था। कुछ समय तो उन्होंने अलग-अलग संभावनाओं पर विचार करने में लगाए। इसके बाद करीब पांच साल तक इंजन में अलग-अलग तरह के प्रयोग किया। हवा के प्रेशर से इंजन चलाने का आइडिया उन्हें बोरवेल मशीन को देखकर आया। उनका कहना है कि बोरवेल मशीन में एयर प्रेशर का इस्तेमाल होता है, इसी से उन्हें लगा कि अगर नियंत्रित तरीके से हवा के दबाव का इस्तेमाल किया जाए, तो इंजन को चलाया जा सकता है। बादल ने कबाड़ से इंजन खरीदा और करीब 300 पाउंड क्षमता वाली एयर कंप्रेसर मशीन की सहायता से स्कूटी के पुराने इंजन पर आवश्यक बदलाव करते हुए लगातार परीक्षण किया।
         कई बार आर्थिक जरूरतों के बीच उन्हें पत्नी के गहने तक गिरवी रखने पड़े। दिन में दुकान पर बाइक रिपेयरिंग का काम करने के बाद देर रात तक इंजन पर प्रयोग करते थे। बादल वर्मा का दावा है कि इंजन सफल हो चुका है। अब गाड़ी का मॉडल बनाकर उसमें टंकी फिट करनी है। टंकी में एक बार हवा भरने के बाद उनकी गाड़ी 50 किलोमीटर तक चल सकती है। गाड़ी की टंकी और डिजाइन बनाने के लिए वैज्ञानिक स्तर के तकनीकी मदद की जरुरत है। उनका कहना है कि अगर किसी सरकारी संस्था, तकनीकी संस्थान या विशेषज्ञ की मदद मिल जाये तो वे इस तकनीक पर और बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं।
        बात करें तहतक की तो वर्तमान समय में पेट्रोलियम पदार्थों की महँगाई और संकट को देखते हुए बादल वर्मा को आधुनिक तकनीक और आर्थिक सहयोग दिया जाना आवश्यक है, ताकि आम लोगों को इसका लाभ मिल सके। यहाँ यह भी बताना लाजिमी होगा कि छत्तीसगढ़ भारत का एक ऐसा राज्य है जहाँ, बेशकीमती प्राकृतिक सम्पदाएं भरी पड़ी हैं वहीं, प्रतिभाओं की भी कमी नहीं है। जरूरत है उन्हें अवसर देने की।

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