केलो स्टील एंड पॉवर की जनसुनवाई पर होगा जमकर विरोध, गुस्से में ग्रामीण और चिंता में पर्यावरण प्रेमी

💥पर्यावरण विभाग जहाँ शकुनि के वेश में, वहीं प्रशासन बना धृतराष्ट्र।

💥धन कुबेर जहाँ दुर्योधन के रोल में, तो वहीं सिसक रही द्रौपदी बनी पर्यावरण।

💥लगातार एक के बाद एक उद्योग स्थापना को लेकर उठ रहे सवाल।

💥जिलेवासियों का जानलेवा प्रदूषण से जीना हो रहा मुहाल।

तहतक न्यूज /रायगढ़।

रायगढ़ को धन कुबेरों का गढ़ कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। उद्योग मालिक एक से दो, दो से चार न जाने कितने प्लांट लगाते जा रहे हैं इसकी कोई गिनती नहीं। इनकी पाँचों ऊँगलियाँ ही नहीं, हाथपैर की पूरी बीसों उँगलियाँ घी में और सिर कड़ाही में नजर आ रही है। यह कोई नहीं देख रहा है कि इससे रायगढ़ और रायगढ़ वासियों को क्या,कैसे और कितना फायदा मिल रहा है और इससे नुकसान कितना हो रहा है। पर्यावरण प्रेमियों की माने तो इस बात का आंकलन न कर धड़ाधड़ उद्योग स्थापना के लिए पर्यावरण विभाग अनुमति पर अनुमति देता हुआ शकुनि की चाल चल रहा है और शासन-प्रशासन धृष्टराष्ट्र बने हुए है, इधर जिलेवासी अपनी बर्बादी का मंजर संजय की आंखों से देख रहे हैं।



जिले में धड़ाधड़ चल रहे उद्योग स्थापना की अनुमति दिए जाने को लेकर अनेकों सवाल खड़े होने लगे हैं पर्यावरण प्रदूषण की चपेट से राहत दिलाने की तो कोई पहल नहीं हो रही है उल्टे आम जनता को खतरनाक जहरीला वातावरण परोसा जा रहा है। जिले में और नए उद्योग स्थापना की वजह से आबोहवा और कितनी जहरीली होगी, इसकी चिंता किसी को नहीं है। पहले ही जिले वासी भीषण प्रदूषित हवा में साँस लेने को मजबूर हैं, वहीं केलो स्टील एंड पावर लिमिटेड की स्थापना के लिए जनसुनवाई आयोजित की जा रही है। इसकी स्थापना से आस-पास के प्रभावित गांव के लगभग 52 हजार से अधिक ग्रामीण तो सीधे तौर पर प्रभावित होंगे ही, इसका असर पूरे जिले की खराब आबोहवा पर आग में घी की तरह पड़ेगा और लोग बीमारियों से जूझते हुए एड़ियाँ रगड़-रगड़ कर मरने को मजबूर होंगे।

जैसा की इन दिनों जिले में एक और उद्योग की स्थापना होने जा रही है और कहीं न कहीं आम जनता में विरोध के स्वर मुखर होने लगी है। जिले के तमनार ब्लॉक के बरपाली में केलो स्टील एंड पावर लिमिटेड नाम से एक वृहद प्लांट लगाए जाने के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु जन सुनवाई रखी गई है। पर्यावरण मित्रों ने बताया कि जिले की जहरीली हो चुकी आबोहवा में तेजी से बढ़ते कई तरह की गंभीर बीमारियो के बीच जीने को आम जन मजबूर हैं और छत्तीसगढ़ शासन खामोशी की चादर ताने सो रहा है।
रायगढ़ में उद्योग की अनुमति दे देकर जनता को प्रदूषण और बीमारियों से मारने का पूरा प्लान बना रखा है।
यदि शासन सभी उद्योगों का निरीक्षण ईमानदारी से करवाए तो 70 प्रतिशत उद्योग प्रदूषण फैलाने के जुर्म में बंद हो जायेंगे और उनके मालिक भी जेल की हवा खाएंगे। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि अब जिले में किसी भी तरह के उद्योगों की स्थापना की अनुमति न दी जाए।

स्थानीय जनता के हित और पर्यावरण संरक्षण को लेकर उद्योगों को न जाने कितने नियम व शर्तों का पालन करना होता है। जनसुनवाई के दौरान इन सब बातों को रखा जाता है और जनता से समर्थन माँगा जाता है, लेकिन विडम्बना ये है कि भारी विरोध के बावजूद भी इन्हें अनुमति मिल जाती है। मामले की तह तक जाकर देंखे तो जनसुनवाई महज एक दिखावा है। चुनाव की तरह इसमें भी पानी की तरह पैसा बहाया जाता है और येन-केन-प्रकारेण जनसुनवाई संपन्न करा ली जाती है। फिर स्थापना के बाद तो जैसे कंपनियों को मनमानी करने का लाइसेंस मिल जाता है। जनता चीखे, चिल्लाये या जहन्नुम में जाये किसी को कोई मतलब नहीं न कोई सुनवाई नहीं।


फिलहाल क्षेत्र वासियों में केलो स्टील एंड पॉवर लिमिटेड की जनसुनवाई को लेकर काफी आक्रोश है और पुरजोर विरोध की तैयारी चल रही है। लोगों का कहना है कि अब और अत्याचार नहीं सहेंगे। जल-जंगल-जमीन को किसी भी कीमत पर बर्बाद नहीं होने देंगे और ना ही किसी कंपनी को आने देंगे।
उल्लेखनीय है कि सांसद ग्राम छर्राटांगर व डोकरबूड़ा के ग्रामीणों के प्रबल विरोध के आगे ब्लैक डायमंड कंपनी को घुटने टेकने पड़े और कहना पड़ा कि अब बारूद की फैक्ट्री नहीं लगेगी, वहीं अब एनटीपीसी और वीपीआर की मनमानी व तानाशाही रवैये के खिलाफ घरघोड़ा वासी पूरजोर मुखालफत पर उतर आये हैं और किसी बड़े आंदोलन के मूड में नजर आ रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *