💥शादी के सपने हुए चूर, दहशत और असमंजस में युवाओं के लिए शादी बनी पहेली।
तहतक न्यूज। पुरुष प्रधान समाज अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और धीरे-धीरे इसका स्वरुप नारी प्रधान समाज के रूप में बदलता दिखाई दे रहा है। आज नारियों के बढ़ते वर्चस्व और उनकी अति महत्वाकांक्षा के आगे पुरुष वर्ग लाचार नजर आ रहा है। देश में हाल के वर्षों से कुछ ऐसे सनसनीखेज और भयावह आपराधिक मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें पत्नियों द्वारा अपने प्रेमी या अन्य साथियों के साथ मिलकर पतियों की क्रूरता से हत्या करने और शवों को ठिकाने लगाने के अलग-अलग तरीके अपनाए गए। इनमें 'नीला ड्रम' और पहाड़ से धकेलने जैसी घटनाएं चर्चा का विषय रही हैं। मार्च 2025 में उत्तर प्रदेश के मेरठ में मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर पति सौरभ राजपूत की नशीला पदार्थ देकर हत्या कर दी थी। इसके बाद शव के टुकड़े कर उसे सीमेंट और रेत के साथ एक नीले प्लास्टिक के ड्रम में सील कर दिया था। कुछ इसी तरह से राजस्थान के अलवर (खैरथल-तिजारा क्षेत्र) में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था, जहां सुनीता नामक महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति हंसराज की हत्या कर दी और शव को जल्दी गलाने के लिए नमक भरकर नीले ड्रम में छिपा दिया था।
इसी तरह कुछ अन्य आपराधिक मामलों में पतियों या करीबियों को रास्ते से हटाने के लिए पहाड़ों की वादियों से नीचे धक्का देने, जहरीले सांपों से कटवाने या धारदार हथियारों से वार करने जैसी साजिशों की खबरें भी देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आई हैं। इन सब खबरों से इंसान उबर नहीं पाया था कि स्तब्ध कर देने वाली एक और घटना ने कथित पुरुष प्रधान समाज को विचलित कर दिया है।

विदित हो कि महाराष्ट्र के पुणे जिले के बारामती में एक पत्नी ने फिल्मी अंदाज (दृश्यम फिल्म की तरह) में अपने पति को जिंदा दफनाने की खौफनाक साजिश रची थी, लेकिन ऐन वक्त पर मजदूरों की सूझबूझ और पुलिस की तत्परता से पति को जिंदा बचा लिया गया। यह पूरी घटना बारामती की इंद्रप्रस्थ सोसाइटी में रहने वाले प्रवीण प्रकाश जगताप (41 वर्ष) और उनकी पत्नी शर्मिला जगताप (38 वर्ष) से जुड़ी है।

बता दें कि पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता था। आरोपी पत्नी शर्मिला (जो कि बी.फार्मा ग्रेजुएट है) ने पति को रास्ते से हटाने के लिए खाने में नशीली दवाइयां देकर बेहोश कर दिया और पति के अर्ध-बेहोश होने पर महिला ने उस पर क्रिकेट बैट से कई बार हमला कर लहू-लुहान कर दिया। महिला ने पहले से ही घर के हॉल से लगी गैलरी में पेड़-पौधे लगाने के बहाने मजदूरों से ईंट-सीमेंट का एक चौकोर चेंबर बनवा रखा था। उसने बेहोश प्रवीण को उसी चेंबर के अंदर डाल दिया और उसे ऊपर से पत्थर की स्लैब से सील करने की कोशिश करने लगी, परन्तु पत्थर वजनी होने के कारण अकेले नहीं कर सकी। फिर उसने मजदूरों को बुलाया, जब महिला उस चेंबर को पूरी तरह बंद करवा रही थी, तब वहां काम कर रहे मजदूरों को चेंबर के अंदर हलचल दिखाई दी और एक शख्स का पैर हिलता हुआ नजर आया। टोकने पर महिला ने कहानी बनाई कि उसके पति मर चुके हैं, उन्होंने कहा था कि घर में ही मेरी समाधि बनाकर अपने पास रखना। मजदूरों को इस बात पर शक हुआ और उन्होंने तुरंत पुलिस हेल्पलाइन (Dial 112) पर फोन कर दिया। सूचना मिलते ही बारामती पुलिस तुरंत फ्लैट पर पहुंची। महिला ने पुलिस को भी गुमराह करने की कोशिश की और कहा कि उसके पति पासपोर्ट के काम से पुणे गए हैं, लेकिन जब पुलिस ने घर की तलाशी ली, तो चेंबर के अंदर से प्रवीण का पैर हिलता हुआ दिखा। पुलिस ने तुरंत स्लैब हटाकर प्रवीण को जिंदा बाहर निकाला और आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया। वर्तमान में पुलिस ने आरोपी पत्नी शर्मिला जगताप को गिरफ्तार कर लिया है और कोर्ट ने उसे पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। इस खौफनाक मामले की हर तरफ चर्चा हो रही है।
देश में इस तरह से पति-पत्नी के बीच मन-मुटाव और प्रेम-प्रसंग से आये दिन घट रही खौफनाक वारदातों के पीछे तह तक जाकर देखें तो एकल परिवार, अपनी प्राचीन संस्कृति व परंपराओं का त्याग, आधुनिकता के नाम पर पाश्चात्य जीवन शैली, फैशन परस्ती और मोबाईल के दुरूपयोग ने पारिवारिक रिश्ते नातों की मर्यादा और प्रेम भाव को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है। एक समय ऐसे था कि विवाह से पूर्व लड़कियाँ घबराती थीं, लेकिन हालात अब ऐसे विपरीत हो गए हैं कि खूबसूरत परी का ख्वाब देखने वाले युवा शादी के नाम से ही घबराने लगे हैं। यह समस्या एक गंभीर पारिवारिक व सामाजिक समस्या के रूप में आकार ले रहा है। समाज के बुद्धिजीवियों, सरकार, कानून और सामाजिक संस्थाओं को इस विषय पर गहरे चिंतन-मंथन करने की आवश्यकता है।



