कितनी बेरहमी से हो रही गौवंशों की तस्करी, रायगढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई

💥12 चक्का ट्रक में ठूंस-ठूंसकर भरे थे गौवंश, धरमजयगढ़ पुलिस ने की घेराबंदी।

💥अमानवीय परिवहन में 7 गौवंशों की मौत, जीवित 39 गौवंशों का सुरक्षित रेस्क्यू।

💥धरमजयगढ़ पुलिस ने की घेराबंदी, जंगल में ट्रक छोड़कर फरार हुए तस्कर, तलाश जारी।

तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। हिन्दू धर्म ग्रंथों और शास्त्रों के अनुसार गौ हत्या (या अनजाने में गाय की मृत्यु होना) को एक बड़ा गंभीर पाप माना गया है। यदि किसी से भूलवश भी ये पाप हो जाय तो पाप के निवारण के लिए शास्त्रों में कठिन प्रायश्चित और शुद्धि के नियम के तहत व्यक्ति को अपने बाल और मूंछ मुंडवाकर साफ वस्त्र धारण करने होते हैं। एक से तीन महीने तक 'प्राजापत्य' या 'चान्द्रायण' व्रत रखना पड़ता है। यही नहीं, व्यक्ति को निश्चित दिनों (जैसे 8 दिन या 1 महीना) तक अपने घर और परिवार से दूर, किसी बगीचे या कुटिया में रहना पड़ता है और अपना चेहरा ढक कर गौशाला में या गायों के पास ही सोना पड़ता है। व्यक्ति को पांच या सात गांवों में जाकर अन्न की भिक्षा मांगनी पड़ती है और उसी को ग्रहण करना होता है तब कहीं जाकर गौ-अपराध से मुक्ति मिलती है, लेकिन चंद पैसों की लालच ने आज इंसान को इतना अंधा बना दिया है कि दुष्परिणामों की परवाह न कर उसी गौमाता की तस्करी करने में लगा है।
      

विदित हो कि “ऑपरेशन शंखनाद” के तहत धरमजयगढ़ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 चक्का ट्रक में क्षमता से अधिक गौवंश को अमानवीय तरीके से ठूंस-ठूंसकर ले जाने की कोशिश को विफल किया है। पुलिस ने ट्रक से कुल 46 गौवंश बरामद किए, जिनमें से 7 गौवंश की मृत्यु हो चुकी थी, जबकि 39 जीवित गौवंश को सुरक्षित रेस्क्यू कर कांजी हाउस धरमजयगढ़ में चारा-पानी की व्यवस्था के साथ रखवाया गया है।
     जानकारी के अनुसार दिनांक 12 अगस्त 2026 के 2.20 बजे) धरमजयगढ़ पुलिस को सूचना मिली कि एक 12 चक्का ट्रक के माध्यम से जंगल के रास्ते गौवंश को तस्करी कर ले जाया जा रहा है। सूचना पर थाना प्रभारी धरमजयगढ़ निरीक्षक राजेश जांगड़े द्वारा तत्काल मुखबिरों को सक्रिय कर संदिग्ध वाहन की जानकारी जुटाई गई। इस दौरान संदिग्ध ट्रक को बरसापाली जंगल की ओर जाते देखे जाने की सूचना प्राप्त हुई। थाना प्रभारी द्वारा तत्काल पुलिस टीम को बरसापाली जंगल मार्ग पर घेराबंदी एवं कार्रवाई के लिए रवाना किया गया। पुलिस टीम के पहुंचने की भनक लगते ही वाहन में सवार पशु तस्कर ट्रक को जंगल में छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गए।
पुलिस टीम ने जंगल में तिरपाल से ढके लावारिस हालत में खड़े 12 चक्का ट्रक क्रमांक CG 14 D 0739 की तलाशी ली। ट्रक के अंदर 46 गौवंश को ठूंस-ठूंसकर, बिना पर्याप्त चारा-पानी की व्यवस्था के बेहद अमानवीय तरीके से परिवहन किया जा रहा था। इनमें 7 गौवंश मृत पाए गए। थाना प्रभारी निरीक्षक राजेश जांगड़े, सहायक उप निरीक्षक मंजू मिश्रा, प्रकाश गिरी गोस्वामी एवं  स्टाफ द्वारा तत्काल जीवित गौवंश को ट्रक से बाहर निकालकर 39 जीवित गौवंश को कांजी हाउस धरमजयगढ़ में पहुंचाकर चारा-पानी की व्यवस्था कराई गई है।
        धरमजयगढ़ पुलिस द्वारा ट्रक चालक एवं फरार पशु तस्करों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ कृषक परिरक्षण अधिनियम, 2004 की धारा 10 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। फरार आरोपियों की पहचान एवं गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम द्वारा लगातार पतासाजी की जा रही है।
            धरमजयगढ़ पुलिस की अपील
रायगढ़ पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि गौवंश की अवैध तस्करी, पशु क्रूरता अथवा संदिग्ध रूप से पशुओं के परिवहन की जानकारी तत्काल नजदीकी थाना अथवा पुलिस को दें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
      “गौवंश तस्करी और पशुओं के साथ क्रूरता करने वालों के विरुद्ध रायगढ़ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। तस्करी में संलिप्त आरोपियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। ‘ऑपरेशन शंखनाद’ के तहत जिले में गौवंश तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।” - एसएसपी शशि मोहन सिंह, रायगढ़।

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