थरथराते बुढ़ापे में अदालत ने सुनाई तीन साल की सजा, जवानी में किया था गोली चलाने का अपराध

💥 34 साल बाद आये फैसले में 85 की उम्र में मिली 3 साल की सजा।

तहतक न्यूज/वैशाली, बिहार। यह पूरा मामला बिहार के वैशाली जिले का है, जहाँ जून 2026 में अदालत ने 34 साल पुराने एक आपराधिक मामले में 85 वर्षीय बुजुर्ग दीप राय (जीसा राय) को 3 साल की जेल की सजा सुनाई है। जवानी में किए गए अपराध का फैसला बुढ़ापे में आने और बुजुर्ग की लाचार हालत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला देश भर में चर्चा और बहस का विषय बन गया है।
            यह मामला साल 1992 का है। वैशाली जिले के राघोपुर प्रखंड के जुड़वानपुर (वनपुर) गांव में एक पड़ोसी दंपति पर आपसी विवाद के दौरान फायरिंग और धारदार हथियारों से जानलेवा हमला किया गया था। पुलिस ने इस मामले में एक ही परिवार के 9 लोगों को आरोपी बनाया था। 1993 में चार्जशीट दाखिल होने के बाद यह मुकदमा लगभग साढ़े तीन दशक तक अदालत में चलता रहा। इस लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान 9 में से 4 आरोपियों की मौत हो चुकी है। वैशाली (हाजीपुर) के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम मनोज कुमार तिवारी की अदालत ने जीवित बचे 5 आरोपियों को दोषी ठहराया। अदालत ने बुजुर्ग दीप राय को आर्म्स एक्ट के तहत 3 साल की सजा सुनाई, जबकि अन्य चार दोषियों को 10-10 साल की कड़ी कैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। कोर्ट से सजा के तुरंत बाद बुजुर्ग दीप राय को उम्र, कमजोर शारीरिक स्थिति और खराब स्वास्थ्य को देखते हुए सीआरपीसी के कानूनी प्रावधानों के तहत कोर्ट से प्रोविजनल बेल (जमानत) मिल गई है, जिसके कारण उन्हें जेल की सलाखों के पीछे नहीं रहना पड़ेगा और वे अपने घर लौट आए हैं।
            सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो जिसमें लाठी पकड़े, झुकी कमर और कांपते कदमों वाले बुजुर्ग दीप राय को दो लोग सहारा देकर कोर्ट परिसर से बाहर ले जाते दिखाई दे रहे हैं। बात तहतक की करें तो इस दृश्य ने भारतीय न्यायिक प्रणाली में होने वाली अत्यधिक देरी पर एक बार फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों के मन में यही बात उठ रही है कि देर से मिलने वाली न्याय नहीं के बराबर है। मानव समाज के लिए यह एक गहरी चिंता का विषय बन गया है।

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