तरबूज और ककड़ियों के बीच पनप रहे थे अफीम के जहरीले पौधे, लोगों को भनक तक नहीं, पुलिस ने किया खुलासा

तहतक न्यूज/तमनार-रायगढ़, छत्तीसगढ़। प्रदेश में इन दिनों अफीम की अवैध खेती की तस्वीरें लगातार सामने आ रही हैं जिससे छत्तीसगढ़ सरकार की छवि धूमिल होती नजर आ रही है। रायगढ़ जिले में पुलिस ने 20 मार्च 2026 को अफीम की अवैध खेती का बड़ा खुलासा किया है। यह कार्रवाई तमनार थाना क्षेत्र के आमाघाट गांव में की गई, जहाँ नदी किनारे करीब 70 डिसमिल जमीन पर अफीम उगाई जा रही थी।
          आरोपी ने पुलिस और स्थानीय लोगों की नज़रों से बचने के लिए अफीम के पौधों को तरबूज, ककड़ी और अन्य सब्जियों की खेती के बीच छिपाकर लगाया था। इस मामले में पुलिस ने मार्शल सांगा (40 वर्ष) नामक व्यक्ति को हिरासत में लिया है, जो मूल रूप से झारखंड के खूंटी जिले का रहने वाला है। आरोपी तमनार क्षेत्र में अपने ससुराल में रहकर खेती कर रहा था और उसने स्थानीय किसानों से सब्जी उगाने के नाम पर जमीन लीज पर ले रखी थी।
               मुखबिर की सूचना पर पुलिस, आबकारी और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। मौके पर बड़ी मात्रा में अफीम के लहलहाते पौधे पाए गए, जिन्हें पुलिस ने जब्त कर लिया है। छत्तीसगढ़ में पिछले 15 दिनों के भीतर अफीम की खेती पकड़े जाने का यह चौथा मामला है। इससे पहले दुर्ग और बलरामपुर (कुसमी और कोरंधा) जिलों में भी इसी तरह की अवैध खेती का खुलासा हो चुका है। इस घटना के बाद राज्य में सियासत भी गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित अन्य विपक्षी नेताओं ने कानून-व्यवस्था और प्रशासन की निगरानी पर सवाल उठाए हैं।
           छत्तीसगढ़ रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग ने सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को अपने सूचना तंत्र को मजबूत करने और अवैध मादक पदार्थों की खेती पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश जारी किए हैं।
          पूरे छत्तीसगढ़ में अफीम की चल रही अवैध खेती में तहतक की बात करें तो ज्यादातर आम ग्रामीण लोगों को अफीम के पौधे की पहचान और इसके उपयोग की जानकारी नहीं है। यही कारण है कि जानकार लोग दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में इसकी खेती खुलेआम करते आ रहे हैं। अब जब छापेमारी हो रही है तो लोगों को जानकारी हो रही है। ऐसे में और भी कई जगहों पर इस तरह की अफीम की अवैध खेती की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि अफीम के बीजों का उपयोग गरम मसाले के रूप में भी किया जाता है, जिसे पोस्ता या खसखस कहा जाता है और यह ऊँचे दाम पर बिकती है।

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