
💥 बच्चों पर सोशल मीडिया के बढ़ते दुष्परिणामों को देखते हुए भारत में लग सकता है बैन।
💥 नाबालिगों पर सोशल मीडिया का पड़ रहा है बुरा असर।
💥 बच्चे हो रहे गुस्सा और चिड़चिड़ेपन का शिकार।
💥 विदेशों में नाबालिगों के सोशल मीडिया पर उपयोग पूर्णतया प्रतिबन्ध।
💥 मद्रास हाईकोर्ट ने विचार करने केंद्र सरकार को दी सलाह।
तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। वर्तमान समय में सोशल मीडिया पूरी दुनिया में छाया हुआ है। बच्चे, बूढ़े और जवान सभी इसका जमकर उपयोग कर रहे हैं, लेकिन नाबालिगों के लिए इसका उपयोग नकारात्मक परिणाम सामने ला रहा है। यही वजह है कि नाबालिगों के सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर दुनिया भर में कड़े कानून लागू किये जा रहे हैं। इसी सिलसिले में मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि भारत को भी ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबन्ध पर विचार करना चाहिए।
भारत सरकार ने ‘ डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन’ नियमों का मसौदा तैयार किया है, जिसके तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट खोलने हेतु माता-पिता की सहमति की आवश्यकता होगी। अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर प्रतिबन्ध लगाने वाली याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह नीतिगत मुद्दा है और सरकार को तय करना चाहिए।
बता दें कि ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र पर पूर्णतया प्रतिबन्ध लगा दिया गया है। ऑस्ट्रेलिया 10 दिसंबर 2025 को 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाने वाला विश्व का पहला देश बन गया है। इस कानून के तहत इंस्टाग्राम, फेसबुक, टिकटॉक, एक्स (X), स्नैपचैट और यूट्यूब जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म शामिल हैं। नियम न मानने वाली कंपनियों पर 4.95 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 275 करोड़ रुपये) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इस कानून में माता-पिता की सहमति का विकल्प भी नहीं रखा गया है।
अमेरिका के फ्लोरिडा में भी 1 जनवरी, 2025 से एक नया कानून लागू हुआ है जो 14 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रतिबंध लगाता है। 14-15 साल के उम्र के बच्चों को अकाउंट रखने के लिए माता-पिता की अनुमति अनिवार्य है।
इन प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य बच्चों को साइबर बुलिंग, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और हानिकारक ऑनलाइन सामग्री से बचाना है।
बहरहाल, अब देखना यह है कि मद्रास हाईकोर्ट के इस महत्वपूर्ण सुझाव पर, कम उम्र के बच्चों पर पड़ रहे सोशल मीडिया के दुष्परिणामों के असर को देखते हुए भारत की केंद्र सरकार क्या कुछ निर्णय लेती है?
