
तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़।
भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्धति “आयुर्वेद” एक मात्र ऐसी चिकित्सा पद्धति है, जिसमें गंभीर से गंभीर बिमारियों से हमेशा के लिए छुटकारा पाया जा सकता है। वर्तमान समय में अंग्रेजी दवाओं का चलन है, जिनका साइड इफेक्ट तो होता ही है साथ ही पूरे जीवन भर दवाओं का इस्तेमाल करना पड़ता है, जबकि जड़ी-बूटीयों पर आधारित आयुर्वेद चिकित्सा में कोई साइड इफेक्ट नहीं होता और न ही ताउम्र दवा लेनी पड़ती है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए औषधालय बुनगा के तत्वाधान में हर महीने स्वास्थ्य एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया जा रहा है। जिसके तहत अक्टुबर माह में गोतमा, बरपाली, बोन्दा, छिछोर उमरिया एवं सिहा में शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें 515 ग्रामीणों ने लाभ उठाया।
इस सम्बन्ध में डॉ.अजय नायक ने बताया कि स्वास्थ्य शिविर का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को जन-जन तक पहुँचाना है। शासन की मंशा यही है कि प्रत्येक व्यक्ति निरोगी रहे, सुखमय जीवन व्यतीत करे। जिसके लिए शासन विभिन्न प्रकार के योजनाएं चला रही है। बुनगा क्षेत्र में सतत स्वास्थ्य एवं जागरूकता शिविरों से गांव के महिला, वृद्ध एवं असक्षम लोग लाभ उठा रहे हैं। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति सिर्फ उपचार ही नहीं अपितु स्वस्थ जीवन जीने के राह प्रसस्त करता है। डॉ.नायक ने बताया कि औषधि सेवन के साथ-साथ परहेज भी जरूरी है तभी रोग का समुचित शमन होता है। शिविर में आयुष चिकित्सक डॉ.जागृति पटेल द्वारा उच्चरक्तचाप एवं मधुमेह से बचाव, स्वस्थ जीवन शैली, योगासन, वातरोग, जरारोग, दिनचर्या, ऋतुचर्या के पंपलेट वितरण कर लोगों को जागरूक किया गया। वहीं फार्मासिस्ट भोज मालाकार एवं राजेश साव द्वारा औषधि वितरण किया गया।
औषधालय बुनगा द्वारा जनहित में ग्रामीण क्षेत्रों में लगाया जा रहा स्वास्थ्य शिविर निःसंदेह सराहनीय है। इस प्रकार के निरंतर शिविर की आवश्यकता पूरे जिले के ग्रामीण इलाकों में है। खास कर पूँजीपथरा का क्षेत्र भीषण प्रदूषण की मार झेल रहा है और यहाँ के स्थानीय ग्रामीण त्वचा, साँस, फेफड़े व नेत्र से सम्बंधित गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।
