ठगों का ठग महाठग निकला रायगढ़ का टी.आर.एन. एनर्जी, गरीब छत्तीसगढ़ियों की हड़पी जमीन

तहतक न्यूज/ नावापारा-टेंडा-रायगढ़,छत्तीसगढ़।
प्राकृतिक सम्पदाओं से भरपूर छत्तीसगढ़ हरिजन, आदिवासी बाहुल्य प्रदेश है। यहाँ की धरती में जितने खजाने भरे पड़े हैं उससे कहीं अधिक सहज, सरल, सीधे-सादे, भोले-भाले और ईमान के धनी यहाँ के मूल निवासी हैं, लेकिन बाहरी लोगों की चिकनी-चुपड़ी बातों में आकर ये छल-कपट तथा झूठ-प्रपंच के शिकार हो जाते हैं और अपनी पूर्वजों की संपत्ति से बेदखल होकर गरीबी के कगार पर चले जाते हैं। खास बात यह है कि इतने ठगे जाने के बाद भी भीरू स्वभाव और सीधेपन के कारण न्याय के लिए कोर्ट-कचहरी तो दूर ये विरोध भी करने से हिचकते हैं।
ऐसी ही नकारात्मक तस्वीरें छत्तीसगढ़ के जिले रायगढ़ के लैलूंगा विधानसभा क्षेत्र में विगत कुछ वर्षों से लगातार उभर कर सामने आ रही हैं।

उल्लेखनीय है कि रायगढ़ जिले में सर्वाधिक उद्योग स्थापित हैं। किसानों को विकास का लॉलीपॉप दिखाकर औनेपौने दामों में उनकी जमीनें खरीद ली जाती हैं और उद्योगों की स्थापना हो जाती है। बता दें कि यहाँ ज्यादातर जमीनें आदिवासियों की है जो गैर आदिवासियों के लिए अहस्ताँतरित हैं, परन्तु नीति-नियमों को ताक पर रख कर सैकड़ों हेक्टेयर आदिवासी जमीन कंपनियों द्वारा हड़प ली गयीं और यह सिलसिला अभी भी जारी है।



ऐसे ही कई गंभीर मामले इस क्षेत्र में आम लोगों के बीच दबी जुबान चर्चा का विषय बने हुए हैं। विश्वसनीय सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार घरघोड़ा के अंतर्गत नावापारा-टेंडा स्थित टी.आर.एन. एनर्जी ने भी दर्जनों किसानों के साथ धोखाधड़ी की है। एक स्थानीय प्रतिष्ठित दैनिक अखबार में छपी खबर के अनुसार टी.आर.एन. एनर्जी ने विश्वनाथ हेमब्रम पिता ठाकुरा हेमब्रम निवासी कटघोरा सहित अन्य कई लोगों के नाम पर जमीन खरीदी की है, वहीं टी.आर.एन. के खिलाफ करीब 30 आदिवासियों ने आवेदन भी दिया है।

टी.आर.एन. द्वारा इस फर्जी तरीके से हुई जमीन खरीदी में तहतक जाकर देखें तो ऐसे चौंकाने वाले और भी कई तथ्य हैं जो सामने आने बाकि हैं। ग्राम गेरवानी में भी हरिजन वर्ग के कुछ गरीब किसानों की जमीन टी.आर.एन. कम्पनी ने अपने ही एक अधिकारी के नाम 2018 में आधी राशि देकर जमीन खरीदी कर उक्त अधिकारी के नाम रजिस्ट्री करा ली है, किन्तु सात वर्ष बीत जाने के बाद भी बाकि रकम के लिए किसान भटक रहे हैं, हालाँकि जमीन का प्रमाणीकरण नहीं हुआ है, जिसके चलते किसानों को बाकि रकम की उम्मीद बँधी हुई है। पीड़ित अज्ञानतावश और आर्थिक रूप से कमजोर होने की वजह से अब तक न्याय पाने से दूर हैं। फिलहाल "तहतक न्यूज" की टीम इस मामले में हकीकत की तहकीकात में तह तक जाकर वास्तविक तथ्यों की पूरी जानकारी आप तक पहुँचाने को प्रयासरत है देखते रहिये :- www.tahtaknews.com

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