मतदाताओं की बल्ले-बल्ले, पांचों ऊँगलियां घी में तो सिर कढ़ाही में

तहतक न्यूज/रायगढ़।
जिले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 मतदाताओं के लिए इस बार खास रहेगा और प्रत्याशियों के लिए यादगार। ये हम नहीं, चुनावी सरगर्मियों की तस्वीरें बयां कर रही हैं। जो सीटें अनारक्षित मुक्त हुए हैं वहाँ की तो बात ही निराली है। उम्मीद से कहीं ज्यादा उम्मीदवार केवल भाग्य आजमाने चुनावी मैदान में कूद पड़े हैं।
वोटरों को आकर्षित करने कुछ प्रत्याशी प्रचार-प्रसार के दौरान एक-दूसरे के देखा-देखी कहीं बकरा भोज दे रहे तो कहीं समानों का उपहार पेश किया जा रहा है। ग्रामीणों में भी काफी हर्ष का माहौल है। पाँच वर्ष में एक बार आने वाले इस सुनहरे अवसर का हर कोई भरपूर फायदा उठा रहा है। ये नहीं सोच रहे हैं कि अभी हजारों-लाखों के मुफ्त रेवड़ी बाँटने वाले बाद में पूरे पाँच सालों तक सूद समेत बटोरेंगे और कोई चूँ तक नहीं कर पायेगा। राशनकार्ड, पेंशन, आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र जैसे जरुरी चीजों के लिए एड़ियाँ रगड़ने होंगे और अंत में बिना चढ़ावे के कोई कार्य नहीं होगा।
बात तह तक की करें तो सीधे और सरल ग्रामीण अहसानमंद होते हैं, इस कूटनीतिक तिलिस्म को समझ नहीं पाते तथा बिना सोचे-समझे अपने मताधिकार का दुरूपयोग कर बैठते हैं और इसका खामियाजा पूरे कार्यकाल तक भुगतते हैं। यही वजह है कि शहरों के अपेक्षाकृत ग्रामीण क्षेत्र विकास की दौड़ में काफी पीछे रह जाता है और भ्रष्टाचार का बोलबाला बढ़ जाता है। बता दें कि प्रचार बंद होने के बाद मतदान पूर्व दो दिन का समय काफी मायने रखता है। वोट पाने के लिए प्रत्याशी धन-बल व बाहु-बल का इस्तेमाल कर हर वो हथकंडे अपनाता है जोकि कानूनन अपराध है।
बहरहाल अब देखना लाजिमी होगा कि शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने, ऐसे अवैध कार्य कलापों पर जिले की चाक-चौबंद पुलिस कितनी सतर्क है और ऐसे असामाजिक तत्वों पर क्या कुछ कार्यवाही करती है?

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