
तहतक न्यूज/रायगढ़,छत्तीसगढ़। ऐसा नहीं है कि खाकी वर्दी वालों का चेहरा कठोर और सपाट होता है। वो भी एक आम इंसान की तरह कोमल हृदय और संवेदना का भाव रखते हैं। यही वजह है कि आज एक पुलिस अफसर की कर्त्तव्यनिष्ठा और संवेदनशिलता ने एक मासूम को किसी अनहोनी से सुरक्षित निकाल माँ के पास पहुँचा दिया। दिल को छू लेने वाली ऐसी ही एक खूबसूरत तस्वीर रायगढ़ शहर में देखने को मिली।
बता दें कि आज 1 मार्च को दोपहर करीब 3 बजे एडिशनल एसपी अनिल कुमार सोनी शहर भ्रमण करते हुए कलेक्ट्रेट में आयोजित मीटिंग में शामिल होने जा रहे थे। तभी सीएमओ तिराहा के आगे भगवानपुर के पास मेन रोड पर उन्होंने देखा कि करीब दो से ढाई वर्ष का एक मासूम बालक अपनी टॉय कार के साथ सड़क के बीचों-बीच खेल रहा है और उसके दोनों ओर से भारी वाहन गुजर रहे हैं, फिर क्या था?उन्होंने तुरंत अपने वाहन चालक को गाड़ी रोकने को कहा और स्वयं फौरन उतरकर बालक को गोद में उठा लिया। आसपास पूछताछ करने पर बालक के परिजनों का कोई पता नहीं चल सका और बालक भी ठीक से बोल पाने की स्थिति में नहीं था। बालक को गोद में लिए एडिशनल एसपी ने उसे पास की दुकान से चॉकलेट और बिस्किट दिलाकर शांत किया और प्यार से पुचकारते हुए उससे उसके घर के बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया। काफी कोशिश के बाद बालक ने इशारों से अपने घर का रास्ता बताया, जिसके आधार पर एडिशनल एसपी करीब एक किलोमीटर तक पैदल चलते हुए भरतपुर मोहल्ले पहुंचे।
मोहल्ले में पहुंचने पर बालक ने अपनी मां को देखते ही पुकारा, जिससे उसकी पहचान शौर्य के रूप में हुई। बालक की मां ने बताया कि वह काफी समय से अपने बेटे को ढूंढ रही थी, अपने बेटे को सुरक्षित देखकर मां ने राहत की सांस ली और एडिशनल एसपी का आभार व्यक्त किया। एडिशनल एसपी अनिल कुमार सोनी ने महिला को आगे बच्चे का विशेष ध्यान रखने और उसे इस तरह अकेला सड़क पर नहीं छोड़ने की समझाइश दी।
बात तहतक की करें तो रायगढ़ पुलिस की सजगता और तत्परता केवल कानून व्यवस्था बनाये रखने तक सीमित नहीं है, अपितु संवेदना के साथ सामाजिक सुरक्षा और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए भी हमेशा तत्पर है। बहरहाल, इस घटना से जहाँ पुलिस का मानवीय चेहरा सामने आया है, वहीं पर एक सवाल भी उठता है कि वहाँ से गुजर रहे लोगों की नजर तो बच्चे पर जरूर पड़ी होगी, लेकिन बच्चे को बचाने की चिंता किसी ने नहीं की। क्या ऐसा कार्य केवल पुलिस की ही जिम्मेदारी है? चाहता तो कोई भी रुक सकता था, मगर यह एक विडंबना है कि आजकल के व्यस्त लोगों के पास इतना समय नहीं है।
💥 तहतक न्यूज अपने सुधी पाठकों से अपील करता है कि बच्चों को हमेशा नजर के सामने रखें। कभी भी सड़क पर अकेला न छोड़ें। थोड़ी सी भी लापरवाही जीवन भर का रोना बन सकती है।💥
