
💥चांपा में गुप्त गोदाम पर छापा, भारी मात्रा में खैर लकड़ी बरामद।
💥पंजाब-हरियाणा तक फैला था तस्करी का नेटवर्क।
तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। खैर की लकड़ी अपने औषधीय और औद्योगिक गुणों के लिए जानी जाती है। खैर की भीतरी लकड़ी को उबालकर कत्था बनाया जाता है, जिसका उपयोग पान में और विभिन्न दवाओं में किया जाता है। इसकी लकड़ी और छाल का उपयोग आयुर्वेद में त्वचा रोगों (जैसे- एक्जिमा, खुजली), गले में खराश, दस्त और मुंह के छालों के इलाज में होता है। लकड़ी के कठोर होने के कारण इसका उपयोग फर्नीचर, कृषि उपकरण, और निर्माण कार्यों में किया जाता है। इसकी लकड़ी के अर्क का उपयोग मछली पकड़ने के जालों और नाव के पालों को रंगने के लिए किया जाता है। यही नहीं, खैर की लकड़ी का उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों और हवन में भी किया जाता है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में इस बेशकीमती लकड़ी का बड़े पैमाने पर अवैध रूप से तस्करी किया जा रहा था, जिसका भंडाफोड़ रायगढ़ वन विभाग ने किया है।


16 फरवरी को मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के बाद रायगढ़ वन मंडलाधिकारी के मार्गदर्शन पर उप वनमण्डलाधिकारी और उड़नदस्ते की टीम ने दबिश दी, तस्करों में हड़कंप मच गया और वे लकड़ी से लदा ट्रक लेकर भागने लगे। वन विभाग की सतर्कता के चलते चंद्रपुर मार्ग पर घेराबंदी कर ट्रक क्रमांक सीजी-06 2022 को पकड़ लिया गया। गिरोह के सदस्यों की मदद से चालक एक बार फरार होने में सफल रहा, लेकिन बाद में छानबीन के दौरान उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में तस्करी के पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। आरोपी चालक और उसके साथी मेलाराम ने बताया कि गिरोह आसपास के जंगलों से खैर की बेशकीमती लकड़ी काटकर सहसपुरी में डंप करता था। इसके बाद लकड़ी को चांपा स्थित मनीष अग्रवाल के एक गुप्त गोदाम में भेजा जाता था। रात लगभग एक बजे रायगढ़ की टीम ने तस्करों का पीछा करते हुए चांपा के अकलतरा भांटा क्षेत्र में संयुक्त छापेमारी की। चांपा वन विभाग के सहयोग से की गई इस कार्रवाई में भारी मात्रा में खैर की लकड़ी बरामद की गई। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के तार अन्य राज्यों से जुड़े हुए हैं। रायगढ़ और चांपा को केंद्र बनाकर तस्कर लकड़ी को ऊंचे दामों पर पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में खपाते थे। इस पूरे ऑपरेशन में उप वनमण्डलाधिकारी तन्मय कौशिक, वन परिक्षेत्राधिकारी संजय लकड़ा और उड़नदस्ता प्रभारी संदीप नामदेव की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वन विभाग ने आम जनता से अपील की है कि यदि जिले में कहीं भी अवैध वन अपराध की घटना हो तो मो. नंबर 99263-21401 एवं टोल फ्री नंबर 1800-233-2631 पर संपर्क कर अवश्य जानकारी दें।
