
💥 अजब शिक्षा विभाग की गजब कहानी, एक दिन का ट्रेनिंग देकर शिक्षकों से 5 दिन का कराया हस्ताक्षर।
💥 विरोध करने पर धमका रहे गुरुजनों को, पुसौर के बीआरसीसी और डीईओ की कार्यप्रणाली पर उठी उंगलियां।
💥 मीडिया की सुगबुगाहट पर मचा हड़कम्प, आनन-फानन में फिर शुरू हुआ प्रशिक्षण।
तहतक न्यूज/पुसौर-रायगढ़, छत्तीसगढ़। प्रदेश के वित्तमंत्री ओपी चौधरी भले ही अपने विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश का सबसे बड़ा नालंदा विश्वविद्यालय बनवाते हुए रायगढ़ को एजुकेशन हब बनाने का सपना देख रहे हैं। वहीं, जिले के विकासखंड पुसौर का शिक्षा विभाग इतना एडवांस हो चला है कि इसके कारनामें देख आप दंग रह जायेंगे। यहाँ पाँच दिन के प्रशिक्षण को एक ही दिन में पूरा कर एक नया विश्व कीर्तिमान बनाये जाने की खबर आयी है। अब आप यह सोच रहे होंगे कि जब पाँच दिन के प्रशिक्षण को एक ही दिन में पूरा किया जा सकता है तो बच्चों की पूरे साल भर की पढ़ाई तो महज एक-दो माह में ही पूरी हो जाएगी। समय और खर्च दोनों में भारी बचत होगी, लेकिन जरा ठहरिये..! हम आपको बता दें कि असली कहानी क्या है? जी हाँ, यहाँ का शिक्षा विभाग ही वित्तमंत्री के सपनों पर पानी फेरते हुए अपने ही गुरुजनों का शोषण करने से बाज नहीं आ रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ताजा मामला जिले के पुसौर ब्लॉक का है। यहां ब्लू प्रिंट ट्रेनिंग के नाम पर ऐसा झोलझाल चला कि शिक्षकों के होश ही उड़ गए। दरअसल, परीक्षा तैयारी को लेकर 11 फरवरी से 15 फरवरी तक शिक्षकों की चल रही ट्रेनिंग को एक रोज में ही समापन कर उपस्थिति पत्रक में 13 शिक्षकों का जबरन हस्ताक्षर कराने का अनोखा मामला प्रकाश में आया है। नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर पीड़ित शिक्षकों ने हैरान कर देने वाली बात बतायी। शिक्षकों के अनुसार जब उन्होंने विरोध किया तो प्रशिक्षण प्रभारी बीआरसीसी और बीईओ तक उन्हें धमकाने से बाज नहीं आए। वहीं, जब तहतक ने इसकी पड़ताल की तो ऐसा दस्तावेज हाथ लगा, जिसमें शिक्षकों के पूरे पाँच दिन की ट्रेनिंग का पहले से ही जबरिया दस्तखत करवाने का पुख्ता सबूत मिला। मामला जब तूल पकड़ने लगा तो आनन-फानन में उन्हें बुलाकर पुनः प्रशिक्षण दिए जाने की बात कही जा रही है।
उल्लेखनीय है कि यह प्रशिक्षण परीक्षा सत्र के बीच में कराया जाना था परंतु प्रभारी अधिकारियों की लापरवाही एवं उपेक्षात्मक रवैया से समयबद्ध नहीं हो पाया जिसका लाभ न तो बोर्ड के परीक्षार्थी छात्र-छात्राओं को मिला और न ही शिक्षकों को बलू प्रिंट के आधार पर शिक्षण का अवसर।
पुसौर विकासखंड के शिक्षा विभाग में चल रहे गड़बड़झाले को लेकर बीईओ शैलेश देवांगन से संपर्क कर जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि यह मामला संज्ञान में आया है और नोटिस भी दिया गया है बाकि प्रशिक्षण का कार्य चल रहा है। वहीं बीआरसीसी शैलेन्द्र मिश्रा का कहना है कि ऐसा कुछ भी नहीं है किसी ने बदमाशी की होगी। ट्रेनिंग चल रही है, 15 तारीख को शिवरात्रि है इसलिए छुट्टी रखा गया है इसलिए 16 तारीख को प्रशिक्षण होगा। उपस्थिति पत्रक में 13 शिक्षकों के 15 तारीख तक हुए समय से पहले के हस्ताक्षर को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह अपना नहीं है मैंने अलग शेड्यूल बनाया है जिसमें 15 तारीख को छुट्टी है 16 तारीख को प्रशिक्षण होगा। यह जो पत्रक है गलत है, किसी ने पेज पलटते-पलटते साइन कर दिया होगा। अब जब 15 तारीख को छुट्टी है तो उस दिन सभी शिक्षकों की उपस्थिति कैसे हो गयी? इस प्रकार एक तरफ बीईओ का यह बयान कि इस मामले में “नोटिस” जारी हुआ है, वहीं बीआरसीसी का यह कहना कि ऐसा कुछ भी नहीं है, जबकि उपस्थिति पत्रक में 13 शिक्षकों के 15 तारीख तक के समय पूर्व हो चुके हस्ताक्षर चीख-चीख कर गड़बड़झाले की पूरी हकीकत बयां कर रहे हैं। उपस्थिति पत्रक के मोबाईल से लिए गए फोटो को गौर से देखें तो जब यह फोटो लिया गया तो स्थान, उस दिन की तारीख और समय ( pusaur 12 february 2026 at 4:43 pm) भी अंकित हुआ है जो स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। यह इस बात को प्रमाणित करता है कि ट्रेनिंग पूरी होने के पूर्व ही यह दस्तावेज 12 फरवरी को ही तैयार कर लिया गया था।

अर्थात् पाँच दिन के प्रशिक्षण को एक ही दिन में निपटा देने की तैयारी थी। सवाल उठता है कि शिक्षकों की पाँच दिन की ट्रेनिंग एक-दो दिन में ही पूरी करने की कोशिश क्यों की जा रही थी? ट्रेनिंग को लेकर जब सबकुछ सही चल रहा है तो “नोटिस” और उपस्थिति पत्रक में प्रशिक्षण समापन से पहले 12फरवरी को ही 15 फरवरी तक का जबरन हस्ताक्षर कराये जाने की संदेहास्पद तस्वीरें क्यों सामने आ रही हैं? विरोध करने पर शिक्षकों को कथित रूप से धमकाये जाने की बात क्यों सामने आयी? अब आप समझ सकते हैं कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग के अंदर अधिकारियों की मनमानी और तानाशाही किस हद तक व्याप्त है। दोषियों पर यदि, कड़ी कार्यवाही नहीं हुई तो शासन का शिक्षा के प्रति गंभीरता जनता के समक्ष सिर्फ और सिर्फ मृग-मरिचिका के सिवा कुछ भी नहीं।
