
💥विरोध करने पर धमका रहे गुरुजनों को, पुसौर के बीआरसीसी और डीईओ की कार्यप्रणाली पर उठी उंगलियां।
तहतक न्यूज/पुसौर-रायगढ़, छत्तीसगढ़। प्रदेश के वित्तमंत्री ओपी चौधरी भले ही अपने विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश का सबसे बड़ा नालंदा विश्वविद्यालय बनवाते हुए रायगढ़ को एजुकेशन हब बनाने का सपना देख रहे हैं। वहीं, इसके उलट शिक्षा विभाग ही वित्तमंत्री के सपनों पर पानी फेरते हुए अपने ही गुरुजनों का शोषण करने से बाज नहीं आ रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ताजा मामला जिले के पुसौर ब्लॉक का है। यहां ब्लू प्रिंट ट्रेनिंग के नाम पर ऐसा झोलझाल चला कि शिक्षकों के होश ही उड़ गए। दरअसल, परीक्षा तैयारी के प्रशिक्षण को एक ही दिन में निपटाकर पूरे 5 दिन तक का 13 शिक्षकों का हस्ताक्षर कराने का अनोखा मामला प्रकाश में आया है। नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर शिक्षकों ने हैरान कर देने वाली बात बतायी। शिक्षकों के अनुसार जब उन्होंने विरोध किया तो प्रशिक्षण प्रभारी बीआरसीसी और बीईओ तक उन्हें धमकाने से बाज नहीं आए। वहीं, जब तहतक ने इसकी पड़ताल की तो ऐसा दस्तावेज हाथ लगा, जिसमें आगामी 2 रोज का पहले से ही दस्तखत शिक्षकों से जबरिया करवाने का पुख्ता सबूत मिला। मामला जब तूल पकड़ने लगा तो आनन-फानन में उन्हें बुलाकर पुनः प्रशिक्षण दिए जाने की बात कही जा रही है।

उल्लेखनीय है कि यह प्रशिक्षण परीक्षा सत्र के बीच में कराया जाना था परंतु प्रभारी अधिकारियों की लापरवाही एवं उपेक्षात्मक रवैया से समयबद्ध नहीं हो पाया जिसका लाभ न तो बोर्ड के परीक्षार्थी छात्र छात्राओं को मिला और न ही शिक्षकों को बलू प्रिंट के आधार पर शिक्षण का अवसर।
पुसौर विकासखंड के शिक्षा विभाग में चल रहे गड़बड़झाले को लेकर बीईओ शैलेश देवांगन से संपर्क कर जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि यह मामला संज्ञान में आया है और नोटिस भी दिया गया है बाकि प्रशिक्षण का कार्य चल रहा है। वहीं बीआरसीसी शैलेन्द्र मिश्रा का कहना है कि ऐसा कुछ भी नहीं है किसी ने बदमाशी किया होगा। ट्रेनिंग चल रही है, कल शिवरात्रि है इसलिए छुट्टी रखा गया है इसलिए 16 तारीख को प्रशिक्षण होगा। उपस्थिति पत्रक में 13 शिक्षकों के 15 तारीख तक हुए समय से पहले के हस्ताक्षर को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह अपना नहीं है मैंने अलग शेड्यूल बनाया है जिसमें 15 तारीख को छुट्टी है 16 तारीख को प्रशिक्षण होगा। यह जो पत्रक है गलत है, किसी ने पेज पलटते-पलटते साइन कर दिया होगा। इस प्रकार एक तरफ बीईओ का यह बयान कि इस मामले में नोटिस जारी हुआ है, वहीं बीआरसीसी का यह कहना कि ऐसा कुछ भी नहीं है, जबकि उपस्थिति पत्रक में 13 शिक्षकों के 15 तारीख तक के समय पूर्व हो चुके हस्ताक्षर चीख-चीख कर गड़बड़झाले की पूरी हकीकत बयां कर रहे हैं। अब सवाल उठता है कि शिक्षकों की ट्रेनिंग को लेकर जब सबकुछ सही चल रहा है तो नोटिस और उपस्थिति पत्रक में प्रशिक्षण समापन से पहले 13 फरवरी को ही तीन दिन का जबरन हस्ताक्षर कराये जाने की संदेहास्पद तस्वीरें क्यों सामने आ रही हैं? अब आप समझ सकते हैं कि आखिर मामला क्या है।
