
तहतक न्यूज/घरघोड़ा-रायगढ़, छत्तीसगढ़। जिले में जनसंख्या वृद्धि और उद्योगों की बढ़ती रफ्तार ने जहाँ जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है वहीं वन्यजीवन भी बुरी तरह से बाधित हो गयी है। यहाँ के वन प्रान्त न केवल खतरनाक और जहरीले प्रदूषण से तबाह हो रहे हैं बल्कि, सबसे बड़े प्राणी कहे जाने वाले हाथी भी तीतर-बितर हो रहे हैं और अकारण काल के गाल में समा रहे हैं। पिछले कुछ महीनों की बात करें तो नन्हें शावकों की ज्यादातर मौतें हुई हैं। आपको बता दें कि अभी बीते तीन दिन पहले फिर एक हाथी शावक की मौत हुई है।
मिली जानकारी के मुताबिक विकासखण्ड घरघोड़ा अंतर्गत ग्राम कया के जंगल क्षेत्र में हाथियों के झुंड में विचरण कर रहे एक शावक के अचानक दो बड़े चट्टानों के बीच दरार में फंसने से दर्दनाक मौत हो गयी। वन विभाग पोस्टमार्टम कार्रवाई के बाद आगे की तहकीकात में जुटी है।

दरअसल, 27 जनवरी की शाम स्थानीय ग्रामीणों द्वारा सूचना दी गई कि वन क्षेत्र में एक हाथी का बच्चा मृत अवस्था में पड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही वन अमला तत्काल मौके के लिए रवाना हुआ, किंतु रात्रि का समय, दुर्गम स्थल तथा मृत हाथी के दल के अन्य हाथियों की आसपास मौजूदगी के कारण उसी समय घटना स्थल तक पहुँचना संभव नहीं हो सका। डीएफओ रायगढ़ ने जानकारी देेते हुए बताया 28 जनवरी को प्रातःकाल वन अमला आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 1310 स्थित घटना स्थल पर पहुँचा और मौके का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि मृत हाथी शावक नर है, जिसकी आयु एक वर्ष से कम प्रतीत होती है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि अत्याधिक ढलान वाले क्षेत्र में गिरने के दौरान वह दो बड़ी चट्टानों के बीच की दरार में फंस गया, जिससे उसे गंभीर आंतरिक चोटें एवं आंतरिक रक्तस्राव हुआ और संभवतः इसी कारण उसकी मृत्यु हुई।
वन विभाग द्वारा बताया गया कि वर्तमान में घटना स्थल के आसपास अभी भी हाथियों का दल विचरण कर रहा है, जिस कारण क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरती जा रही है और निरंतर निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। मृत हाथी शावक का विधिवत पोस्टमार्टम कराए जाने की प्रक्रिया पूर्ण की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने पर मृत्यु के वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच की जाएगी। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में सतर्क रहें और हाथियों से सम्बंधित किसी भी प्रकार की सूचना हो, तत्काल वन अमले को दें।
जिले में हाथियों की लगातार हो रही मौतों और उनकी असामान्य गतिविधियों की मिल रही खबरों की हकीकत की तहकीकात में तह तक जाकर देखें तो जो वास्तविक तथ्य निकल कर सामने आ रहा है, उससे यही प्रतीत होता है कि मानव निर्मित इस गंभीर समस्या के निदान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। जिम्मेदार विभाग घटना के बाद केवल पोस्टमार्टम, मामूली क्षतिपूर्ति और लोगों को सतर्क रहने की अपील के सिवा कुछ भी कर पाने में असमर्थ नजर आता है। जिले में जिस तेजी से उद्योगों की अंधाधुंध स्थापना और विस्तार हो रहा है, उसी रफ्तार से हाथी-मानव द्वन्द भी बढ़ रहा है। जंगलों में मानव दखल और कटते पेड़ों तथा सुखते नदी-नालों की वजह से गजदलों का स्वतंत्र जीवन प्रभावित हो रहा है। विकास के साथ-साथ जीवन दायिनी पंचतत्वों का भी उतना ही ख्याल रखा जाना चाहिए जितना आज कॉर्पोरेट जगत का हो रहा है, वरन वह दिन दूर नहीं जब आने वाली पीढ़ी के लिए यह प्रकृति केवल और केवल तस्वीरों में ही नजर आये।
