ग्रामीण क्षेत्रों की खस्ता हाल सड़कें और बारिश का मौसम

तहतक न्यूज/चिराईपानी। बारिश आते ही जहाँ मौसम सुहावना लगने लगता है तो वहीं परेशानियाँ भी बढ़ जाती हैं। शहरों में तो कम, किन्तु ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को लेकर मुसीबतें कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती हैं। हालांकि सभी ग्रामों को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत मुख्य मार्ग से जोड़ा गया है लेकिन, ठोस मरम्मत के अभाव में इन सड़कों का बुरा हाल किसी से छिपा नहीं है। बारह टन की क्षमता वाले प्रधानमंत्री ग्राम सड़कों पर 40/50 टन ओवर लोड गाड़ियाँ चलाई जा रही हैं तो सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि इन सड़कों की हालत क्या होती होगी?


हम बात कर रहे हैं गेरवानी संकुल की जहाँ कई बड़े उद्योग स्थापित हैं। यहाँ ग्राम चिराईपानी से गेरवानी तक पहुँच मार्ग की स्थिति बेहद खराब है। चिराईपानी से गेरवानी के बीच स्थित ओम रुपेश स्टील प्लांट, वजरान, महालक्ष्मी और सुनील इस्पात में सैकड़ों की तादात में बड़े वाहनों का आवागमन होता है जिनमें 40 से 50 टन तक माल लोड रहते हैं ऐसे में 12 टन तक की क्षमता वाले सड़क कब तक टिक पाएंगे यह बताने की आवश्यकता नहीं है। ग्रामवासियों की माने तो उद्योग स्थापना के पूर्व बारिश के दिनों में भी आवागमन में कोई परेशानी नहीं होती थी लेकिन,जब से यहाँ बड़े प्लांट शुरू हुए हैं तब से सड़क की स्थिति जर्जर होती जा रही है। बरसात में बाईक सवारों और स्कूली बच्चों की परेशानी और बढ़ जाती है। ग्रामवासियों द्वारा अपनी इस समस्या को लेकर शासन-प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया है परन्तु कोरे आश्वासनों के लॉलीपॉप के सिवा कुछ भी हासिल नहीं हुआ।


💥हकीकत की तहकीकात में तहतक जा कर देखें तो जो तथ्य उभर कर सामने आ रहे हैं उससे यही प्रतीत हो रहा है कि विकास के नाम पर केवल चंद लोगों का ही भला हो रहा है आम जनता का नहीं। दिखावे के नाम पर केवल मुख्य मार्ग को मरम्मत करा दिया गया है ग्राम सड़क को नहीं।

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