अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह में 19 सितंबर को आयोजित कवि सम्मेलन में दिग्गज कवियों का होगा अनूठा संगम

💥 देश के नामचीन कवि अपनी शानदार प्रस्तुति से दर्शकों को करेंगे मन्त्रमुग्ध।
तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। रायगढ़ का 'चक्रधर समारोह' छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का एक अनूठा प्रतीक है। महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह न केवल राज्य में बल्कि पूरे देश और दुनिया में एक प्रतिष्ठित मंच बन चुका है। प्रतिवर्ष हिंदू कैलेंडर के अनुसार गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह-2026 का भव्य आयोजन 14 से 23 सितम्बर तक रामलीला मैदान, रायगढ़ में होगा। स्थानीय कलाकारों से लेकर देश-प्रदेश के सुप्रसिद्ध और ख्यातिप्राप्त कलाकारों से सजे इस सांस्कृतिक महाकुंभ में 10 दिनों तक सुर, ताल और नृत्य की अनूठी महफिल सजेगी। इसी तारतम्य में 19 सितंबर शनिवार की रात्रि 9 बजे से काव्य संध्या का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश के ख्यातिप्राप्त कवि हास्य-व्यंग्य, वीर रस और गीतों की प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे।
काव्य संध्या में पद्मश्री से सम्मानित सुरेंद्र शर्मा (दिल्ली) जहाँ हास्य रस से श्रोताओं को गुदगुदाएंगे वहीं, डॉ. प्रवीण शुक्ला (दिल्ली) हास्य-व्यंग्य, श्रीमती कविता तिवारी (लखनऊ) वीर रस, श्रीमती शशि सुरेंद्र दुबे (रायपुर) हास्य काव्य, दिनेश दिग्गज (उज्जैन) हास्य काव्य, अमन अक्षर (इंदौर) गीत तथा किशोर तिवारी (भिलाई) अखिल भारतीय गीतों की प्रस्तुति देंगे। काव्य और साहित्य से सजी यह शाम समारोह के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगी।
         उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ की 'संस्कारधानी' और कला नगरी के रूप में प्रसिद्ध रायगढ़ शहर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के लिए जाना जाता है। इस सांस्कृतिक समृद्धि का सबसे बड़ा प्रमाण हर साल आयोजित होने वाला चक्रधर समारोह है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की कला, संगीत, लोक संस्कृति और शास्त्रीय विधाओं का एक भव्य संगम है, जो दर्शकों को सुर, ताल और घुंघरू की झंकार से सराबोर कर देता है। इस समारोह की शुरुआत रायगढ़ रियासत के भूतपूर्व गोंड राजा महाराज चक्रधर सिंह पोर्ते (1905-1947) की स्मृति और सम्मान में की गई थी। महाराज चक्रधर सिंह स्वयं एक महान संगीतकार, तबला वादक और संगीत के अनन्य संरक्षक थे। उन्होंने संगीत और कला पर कई महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखे और शास्त्रीय नृत्य की दुनिया में 'रायगढ़ घराने' (विशेष रूप से कथक) की स्थापना कर इसे वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दी। कला के प्रति उनके इसी समर्पण को जीवित रखने के लिए इस समारोह की नींव रखी गई। इस आयोजन को भव्य रूप देने में उस्ताद अलाउद्दीन खान संगीत अकादमी, चक्रधर ललित कला केंद्र, संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल और रायगढ़ जिला प्रशासन संयुक्त रूप से काम करते हैं।

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