
तहतक न्यूज/कवर्धा, छत्तीसगढ़।
धान खरीदी में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए शासन द्वारा काफी सख्ती बरती जा रही है, फिर भी जिस शातिराना ढंग से गड़बड़ी हो रही है उसके लिए दाद देनी पड़ेगी। बता दें कि 2026 में छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिले से धान संग्रहण केंद्रों में बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, करीब 7 से 8 करोड़ रुपये की कीमत का 26,000 क्विंटल धान गायब पाया गया है। यह गड़बड़ी मुख्य रूप से बाजार चारभाठा और बघर्रा संग्रहण केंद्रों में पाई गई है। अकेले बाजार चारभाठा केंद्र से लगभग 22,000 क्विंटल धान कम मिला है।
जब अधिकारियों से इस भारी कमी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने दावा किया कि धान चूहों, दीमकों और कीड़ों ने खा लिया है या नमी के कारण खराब हो गया है। जांच के दौरान फर्जी रिकॉर्ड बनाने, फर्जी बिल लगाने, मजदूरों की फर्जी हाजिरी और CCTV कैमरों से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच में अनियमितता पाए जाने पर संग्रहण केंद्र प्रभारी को पद से हटा दिया गया है। शासन ने मामले की गहराई से जांच के लिए समिति गठित की है।
इस घटना को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘चूहा पकड़ने का पिंजरा’ लेकर जिला विपणन अधिकारी कार्यालय में अनोखा प्रदर्शन किया और इसे भ्रष्टाचार करार दिया।
एक तरफ शासन धान खरीदी में किसी भी प्रकार की कोई गड़बड़ी न हो और किसानों को अपना धान विक्रय करने में कोई परेशानी न हो इसके लिए काफी कड़ाई बरती जा रही है, वहीं गड़बड़ी के मामले भी सामने आ रहे हैं। सूखत को लेकर जहाँ मानक वजन से अधिक धान की वसूली हो रही है, वहीं धान की कमी का ठीकरा चूहों और दीमकों के ऊपर फोड़ा जा रहा है सवाल उठता है कि किसानों के खून और पसीने की कमाई धान में व्यवधान क्यों? इस सूखत का आखिर क्या है राज? देश में बड़े-बड़े गणितज्ञ हैं, क्यों नहीं निकाल पा रहे हैं इसका हिसाब? इस कमी का हिसाब क्या ऐसे ही देगी समिति और ऐसे ही 40 किलो के प्रति कट्टे में 500से 700 ग्राम अतिरिक्त धान देकर नुकसान की भरपायी करेंगे किसान?
