रायगढ़ के अष्टमहालक्ष्मी मंदिर वैष्णवी धाम में होगा शारदीय नवरात्रि का भव्य आयोजन

💥अखंड घृत ज्योत, दुर्गा सप्तशती पाठ, हवन, गरबा एवं भजन संध्या के साथ होगा विशेष आयोजन; अंतिम दिन भंडारा।
तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। राज्य के प्रथम माँ अष्टमहालक्ष्मी मंदिर वैष्णवी धाम, ग्राम पंडरीपानी, रायगढ़ में शारदीय नवरात्रि का पर्व इस वर्ष 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के साथ श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में मनाया जाएगा। नवरात्रि के दौरान अखंड घृत ज्योत प्रज्ज्वलन, दुर्गा सप्तशती पाठ, हवन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत माता का गरबा एवं भजन संध्या का आयोजन भी विशेष आकर्षण रहेगा। नवरात्रि के अंतिम दिन श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
        विदित हो कि गजमार पहाड़ी के पीछे ग्राम पंडरीपानी में हरियाली से आच्छादित क्षेत्र में स्थित माँ अष्टमहालक्ष्मी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिक अनुभूति का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही वातावरण में एक अलग तरह की आध्यात्मिक अनुभूति होती है। माँ के दर्शन होते ही श्रद्धालुओं के हाथ स्वतः ही प्रार्थना के लिए उठ जाते हैं और मन में यही भाव जागता है कि माँ लक्ष्मी अपने भक्तों के सभी दुःख और कष्ट हर लेंगी।
2017 में रखी गई थी मंदिर की नींव
       मंदिर के संबंध में पंडित रविभूषण शास्त्री जी ने बताया कि पंडरीपानी स्थित महालक्ष्मी मंदिर की नींव वर्ष 2017 में रखी गई थी और निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ था। वर्ष 2023 में मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ। इसके बाद माता की कृपा से 6 दिसंबर से 10 दिसंबर के शुभ मुहूर्त में प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई।
मंदिर में विराजित हैं दस महाविद्याएं
       मंदिर परिसर में दस महाविद्याओं - माँ तारा, माँ काली, माँ छिन्नमस्ता, माँ षोडशी, माँ भुवनेश्वरी, माँ त्रिपुरभैरवी, माँ धूमावती, माँ बगलामुखी, माँ मातंगी एवं माँ कमला का दिव्य स्वरूप विराजमान है। इसके साथ ही माँ कमला, माँ विमला, माँ मंगला तथा भैरव बाबा की भी स्थापना की गई है।
वैष्णो देवी धाम से लाई गईं तीन पिंडियां
       मंदिर की विशेषता यह भी है कि माता वैष्णो देवी धाम से तीन पिंडियां - महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती लाकर यहाँ स्थापित की गई हैं। यही कारण है कि वैष्णवी धाम श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है।
गजदेवता और जय-विजय हैं मंदिर के द्वारपाल
       मंदिर परिसर में 12 गजदेवताओं की स्थापना की गई है, जो सीढ़ियों के द्वार पर विराजमान हैं। मंदिर के मुख्य द्वार पर माता के द्वारपाल जय और विजय विराजमान हैं, जबकि द्वार पर गजलक्ष्मी की भी स्थापना की गई है।
मंदिर की वास्तुकला में 11 छोटे गुंबदों के साथ एक विशाल नीलचक्र भी स्थापित किया गया है, जो मंदिर की भव्यता को और बढ़ाता है।
सप्ततीर्थ कूप की भी है विशेष मान्यता
       पंडित रविभूषण शास्त्री जी ने बताया कि मंदिर प्रांगण में एक प्राचीन प्राकृतिक कुआं स्थित है, जिसे सप्ततीर्थ कूप कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस कूप में यजमान को स्नान कराने से ग्रह दोष की शांति होती है। इस मंदिर के नीचे स्थित भवन का नाम प्रियंबदा भवन रखा गया है।
जयपुर और ओडिशा के कारीगरों ने दिया मंदिर को भव्य स्वरूप
       मंदिर निर्माण में जयपुर, ओडिशा और राजस्थान से आए कारीगरों ने अपनी कला और कौशल का योगदान दिया। वहीं माँ महालक्ष्मी की मूर्ति को ओडिशा के पद्मश्री प्रभाकर महाराणा ने तैयार किया है। शास्त्री जी ने इस अद्भुत कलाकृति के लिए पद्मश्री प्रभाकर महाराणा के प्रति हृदय से सम्मान व्यक्त किया।
चैत्र एवं क्वाँर मास के नवरात्र में होते हैं विशेष आयोजन
        मंदिर में प्रतिवर्ष चैत नवरात्र और कुंवार नवरात्र के अवसर पर विशेष पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। शारदीय नवरात्र के दौरान भी यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुँचते हैं।
पूर्ण होती हैं मनोकामनायें
     श्रद्धालुओं में मान्यता है कि माँ अष्टमहालक्ष्मी के दरबार में आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। अनेक श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण होने के बाद मंदिर प्रबंधन एवं पंडित जी को इसकी जानकारी देते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-पुण्य करते हैं।
मंदिर के प्रति स्थानीय लोगों के साथ-साथ विभिन्न वर्गों में भी गहरी आस्था देखने को मिलती है। बीते दिनों स्थानीय विधायक एवं मुख्यमंत्री जी ने भी यहाँ पहुँचकर माता के दर्शन का लाभ लिया। स्थानीय अधिकारी-कर्मचारी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रबुद्ध जनप्रतिनिधि भी माँ अष्टमहालक्ष्मी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते रहे हैं।
नवरात्र में श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण
        इस वर्ष 11 से 19 अक्टूबर तक होने वाले शारदीय नवरात्रि आयोजन में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी समावेश किया गया है। अखंड घृत ज्योत, दुर्गा सप्तशती पाठ एवं हवन के साथ माता का गरबा और भजन संध्या श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। नवरात्रि के समापन अवसर पर भंडारे का आयोजन किया जाएगा।मंदिर समिति ने बताया कि जो जजमान घृत ज्योत जलवाना चाहते हैं वे 2100 रु का रसीद ले सकते हैं साथ ही समिति के निर्णयानुसार ज्योत को यजमान के हाथों ही जलवाया जाता है
माँ अष्टमहालक्ष्मी वैष्णवी धाम में नवरात्रि के नौ दिनों तक श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम देखने को मिलेगा।

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